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Bihar News: सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना के लिए जाना जाता है, और इस दौरान भारत के कोने-कोने से शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जहां भक्त जल नहीं चढ़ाते, बल्कि मां गंगा स्वरूप दो नदियां स्वयं शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं।
कटरा प्रखंड के धरौन गांव में स्थित बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव स्वयं “जलसमाधि” में चले जाते हैं। मंदिर बागमती और लखनदेई नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। जैसे ही सावन की पहली सोमवारी आती है, दोनों नदियों का पानी बढ़ जाता है और शिवलिंग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। पूरा सावन शिवलिंग जल में डूबा रहता है और यह दृश्य श्रद्धालुओं को चमत्कारिक प्रतीत होता है।
यह स्थान धार्मिक ही नहीं, प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी बेहद आकर्षक है। जल के बीच स्थित यह शिव मंदिर बाढ़ की भयानक लहरों के बीच भी अक्षुण्ण रहता है। श्रद्धालु नाव के जरिए नदी पार करके मंदिर तक पहुंचते हैं और जलमग्न शिवलिंग के दूर से ही दर्शन करते हैं।
स्थानीय पुजारी दानी बाबा, जो वर्षों से मंदिर में सेवा कर रहे हैं, बताते हैं कि “भोलेनाथ सावन भर जल में लीन रहते हैं और भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते। स्वयं मां गंगा, बागमती और लखनदेई के रूप में यहां आती हैं और भगवान को जल अर्पित करती हैं।”
ग्रामीण सुनील कुमार के अनुसार, “यह मंदिर बहुत ही चमत्कारी है। जो भी भक्त यहां सच्चे मन से आता है, उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। चाहे सीतामढ़ी हो, मुजफ्फरपुर या नेपाल से — दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं।”
पुल ना होने के कारण भक्त नाव से मंदिर तक पहुंचते हैं, जिससे यह यात्रा एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है। बरसों पुराना यह शिव मंदिर सावन के महीने में भक्तों के लिए आस्था और आर्शीवाद का प्रतीक बन जाता है।
वर्तमान में जब भक्त कई मंदिरों में लंबी कतारों में खड़े रहते हैं, वहीं बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर में शिवलिंग पर नदियों द्वारा किया जाने वाला यह प्राकृतिक जलाभिषेक हर किसी को चकित कर देता है। यह मंदिर बिहार के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक अद्भुत स्थान रखता है, और निश्चित रूप से शिवभक्तों के लिए यह एक बार अवश्य देखने योग्य स्थान है।

