अपनी भाषा चुनेें :
World News: दुनिया में जब किसी देश की ताकत की बात होती है, तो बड़ी सीमाएं, विशाल सेना और अपनी मुद्रा उसके विकास का प्रतीक मानी जाती हैं। लेकिन यूरोप का छोटा सा देश लिकटेंस्टीन इस सोच को पूरी तरह बदल देता है। न तो यह अपनी कोई मुद्रा छापता है और न ही इसके पास कोई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, फिर भी यह दुनिया के सबसे स्थिर और समृद्ध देशों में गिना जाता है।
स्विस फ्रैंक बना स्थिरता की कुंजी
सिर्फ 160 वर्ग किलोमीटर में फैले लिकटेंस्टीन ने अपनी राष्ट्रीय मुद्रा के बजाय पड़ोसी देश स्विट्ज़रलैंड की मुद्रा ‘स्विस फ्रैंक’ को अपनाया हुआ है। इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था को असाधारण स्थिरता दी है। न तो इसे मुद्रास्फीति का खतरा सताता है और न ही केंद्रीय बैंक चलाने की जरूरत। विशेषज्ञों के अनुसार, इस चतुर नीति ने लिकटेंस्टीन को आने वाली वित्तीय चुनौतियों से हमेशा बचाए रखा।
मैन्युफैक्चरिंग ही बना विकास का इंजन
लिकटेंस्टीन का असली आधार उसका ‘हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर’ है। यहां बनी मशीनें, उपकरण और माइक्रो-टेक प्रोडक्ट्स दुनियाभर में निर्यात होते हैं। प्रसिद्ध कंपनी हिल्टी यहीं से संचालित होती है, जो आधुनिक औद्योगिक उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति करती है। यहां नागरिकों से ज्यादा पंजीकृत कंपनियां हैं, जिसके कारण बेरोजगारी दर लगभग शून्य है।
सुरक्षा में भी दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल
देश की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सुरक्षा है। यहां अपराध दर इतनी कम है कि लोग अपने घरों के दरवाजों पर ताले तक नहीं लगाते। इसका श्रेय सख्त कानून व्यवस्था, छोटे सामाजिक ढांचे और नागरिकों की अनुशासित जीवनशैली को दिया जाता है।
“छोटा देश, बड़ी सोच” की मिसाल
लिकटेंस्टीन इस बात का प्रमाण है कि किसी देश का विकास उसके आकार या प्राकृतिक संसाधनों पर नहीं, बल्कि नीति-निर्धारकों की दूरदृष्टि और नागरिकों की जिम्मेदारी पर निर्भर करता है। यह देश बताता है कि आर्थिक ताकत हमेशा भौगोलिक आकार से नहीं, बल्कि समझदारी से बनती है।

