India News: शांति और पर्यटन के लिए मशहूर लद्दाख के लेह में बीते बुधवार को हुई हिंसा ने शहर को तनावपूर्ण बना दिया है। इसके बाद से सड़कों पर सन्नाटा छाया हुआ है, बाजार बंद हैं और खाली टैक्सियां खड़ी हैं। सुरक्षा की दृष्टि से हर 20 मीटर पर जवान तैनात हैं। होटल से लेकर बाजार तक हर जगह डर का माहौल है।
पर्यटकों के न आने से स्थानीय टैक्सी चालकों और दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। वे अपनी आजीविका पर असर महसूस कर रहे हैं। पिछले चार दिनों में एक भी पर्यटक लेह नहीं पहुंचा, जिससे जगह की आर्थिक रीढ़ कमजोर हो गई है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस हिंसा के पीछे उनकी संस्कृति को खत्म करने का प्रयास है। बाहरी लोग उनकी भूमि खरीद कर पहचान मिटाने का सम्बंधित आरोप लगा रहे हैं।
मौसम और हिंसा ने किया दोहरी मार
हाल ही में बारिश की वजह से पहले से ही मुश्किलों में घिरे लेहवासियों के ऊपर अब हिंसा का संकट आ गया है। इससे व्यापार पूरी तरह ठप्प हो गया है और रोज़गार के अवसर खत्म होते जा रहे हैं। स्थानीय दुकानदार कहते हैं कि कर्फ्यू के चलते 4 घंटे की ढील मिली है, परंतु सामान की कमी बनी हुई है।
सोनम वांगचुक आंदोलन और युवा गुस्सा
सोनम वांगचुक का शांतिपूर्ण गांधीवादी आंदोलन अपेक्षित सफलता न पाने पर युवा वर्ग ने अलग मोड़ लिया, जो हिंसा का कारण बना। डीजीपी जामवाल के पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर दिए गए बयान पर भी स्थानीय लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि लद्दाख हमेशा सेना के साथ खड़ा रहा है और देशभक्ति में उनका कोई सानी नहीं।



