Bihar News: राजनीति की पिच पर अपनी गुगली से विरोधियों को पस्त करने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए दिल्ली की अदालत से आई खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। बहुचर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ यानी जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को वो फैसला सुना दिया, जिसका डर लालू परिवार को लंबे समय से था। सीबीआई की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए जज विशाल गोगने की अदालत ने लालू यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी समेत 40 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दे दिया है।
कोर्ट में तेजस्वी और तेज प्रताप की मौजूदगी?
आज जब कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई, तो माहौल काफी गंभीर था। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और उनके भाई तेज प्रताप यादव खुद कोर्ट में मौजूद थे। हालांकि, सेहत संबंधी कारणों से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि अब यह केस केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रायल के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा।
क्या है यह जमीन के बदले नौकरी का खेल?
यह पूरा मामला उस दौर का है जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री की कुर्सी संभाल रहे थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि 2004 से 2009 के बीच रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर उन लोगों को नौकरियां बांटी गईं, जिन्होंने लालू परिवार या उनके करीबियों को अपनी जमीनें कौड़ियों के दाम पर बेच दीं या उपहार में दे दीं। सीबीआई का आरोप है कि इन नियुक्तियों में न तो नियमों का पालन हुआ और न ही योग्यता देखी गई।
गरीबी का फायदा और फर्जीवाड़े का जाल?
सीबीआई की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि जिन युवाओं को नौकरियां दी गईं, वे बिहार के अत्यंत पिछड़े और गरीब तबके से आते थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में तो फर्जी स्कूल सर्टिफिकेट और संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां कर दी गईं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अब इन सभी 40 आरोपियों को कोर्ट में अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी।
किसे मिली राहत और किसे जेल का डर?
इस मामले में कुल 103 आरोपी शामिल थे, जिनमें से अदालत ने 52 को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। लेकिन, मुख्य परिवार और उनके सहयोगियों पर ट्रायल की तलवार लटक गई है। आने वाले दिनों में कोर्ट रूम के अंदर गवाहों की गवाही और सबूतों की कड़ियां लालू परिवार की राजनीतिक दिशा तय करेंगी।



