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India News: सर्द सुबह थी। किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में लोग रोज़ की तरह अपनी दिनचर्या शुरू कर ही रहे थे कि तभी फिज़ा में गोलियों की गूंज फैल गई। अचानक माहौल बदल गया — घबराहट, डर और भाग-दौड़। क्योंकि सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो चुकी थी।
यह हमला कोई अचानक की गई कार्रवाई नहीं थी। सुबह ही खुफिया एजेंसियों को पक्की सूचना मिली कि कुछ आतंकी इस इलाके में सक्रिय हैं। सूचना मिलते ही सेना की व्हाइट नाइट कोर और जम्मू-कश्मीर पुलिस बिना वक्त गंवाए मैदान में उतर गई।
खुफिया अलर्ट के बाद घेरा
सूत्रों के मुताबिक दो-तीन आतंकी पहाड़ियों में छिपे थे। जैसे ही सर्च टीम आगे बढ़ी, आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। और फिर शुरू हुई सीधी गोलीबारी — पहाड़ों की खामोशी में गूंजती गोलियां, और उस बीच जवानों का साहस।
सुरक्षाबलों ने इलाके को पूरी तरह घेर लिया है ताकि कोई भी आतंकी भागने न पाए। एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स सील हैं, और गांववालों से घरों में रहने की अपील की गई है।
लोगों में डर और उम्मीद दोनों
इलाके में तनाव है। लोग खिड़कियों के पीछे, दरवाज़ों की ओट में खड़े, बेचैन नज़रों से सब कुछ देख रहे हैं।
कई लोग कह रहे थे,
“आखिर कब ये सब खत्म होगा? हम बस अपने बच्चों के साथ शांति चाहते हैं।”
लेकिन इन चेहरों पर डर के साथ उम्मीद भी है — उम्मीद कि हमारे जवान इन दहशतगर्दों को छोड़ेंगे नहीं।
पिछले महीनों में बढ़ी गतिविधियां
ये मुठभेड़ किसी एक दिन की कहानी नहीं। पिछले कुछ महीनों से किश्तवाड़ और डोडा बेल्ट में आतंक की हलचल फिर बढ़ी है।
सुरक्षाबल लगातार अलर्ट मोड पर हैं। कहा जा रहा है कि ये वही आतंकी ग्रुप है जो पिछले कई महीनों से ज़मीन पर सक्रिय था और हाल की संदिग्ध गतिविधियों में भी शामिल रहा।
सेना का बयान
व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर पोस्ट किया:
“खुफिया जानकारी पर संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है। आतंकियों से संपर्क स्थापित हो चुका है। फायरिंग जारी है।”
सीधे शब्दों में — जंग जारी है और आतंकियों के बचने के रास्ते बंद।

