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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अनदेखी करने पर सख्त रुख अख्तियार किया है। मामला खूंटी जेल की अधीक्षक अनुराधा सिंह से जुड़ा है, जिन्हें हाईकोर्ट ने मेसर्स अष्ट विनायक इंटरप्राइजेज का बकाया भुगतान करने के लिए महज 24 घंटे का समय दिया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए जेल अधीक्षक को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 19 दिसंबर तक भुगतान नहीं हुआ, तो उन्हें खुद कोर्ट में हाजिर होकर अपनी सफाई देनी होगी।
किचन शेड का काम पूरा, लेकिन भुगतान के लिए 4 साल का इंतजार
पूरा विवाद खूंटी जेल में किचन शेड के निर्माण से शुरू हुआ। साल 2021-22 में अष्ट विनायक इंटरप्राइजेज ने ₹17.41 लाख के टेंडर पर काम पूरा किया था। विभाग ने पहली किश्त के रूप में ₹15.35 लाख तो दे दिए, लेकिन ₹2,08,985 की शेष राशि को जेल अधीक्षक ने आवंटन न होने का बहाना बनाकर रोक दिया। ठेकेदार थक-हारकर मार्च 2023 में हाईकोर्ट की शरण में पहुँचा। कोर्ट के पहले के आदेशों के बावजूद जब अधीक्षक ने कोई कदम नहीं उठाया, तो मामला अवमानना (Contempt of Court) तक पहुँच गया।
अवमानना का खतरा: कल कोर्ट में देनी होगी हाजिरी
प्रार्थी के अधिवक्ता विशाल कुमार राय ने बताया कि हाईकोर्ट ने अब इस टालमटोल की नीति को बर्दाश्त करने से इनकार कर दिया है। खंडपीठ ने आदेश दिया है कि या तो कल तक भुगतान की रसीद पेश करें, वरना सशरीर अदालत में हाजिर हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन न होने की स्थिति में जेल अधीक्षक के विरुद्ध अवमानना के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है, क्योंकि अब अधिकारी के पास बहाने बनाने का समय खत्म हो चुका है।

