Jamshedpur: जमशेदपुर के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी 14 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार तड़के सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। इस खबर के साथ ही गांधी परिवार और पूरे जमशेदपुर शहर ने राहत की सांस ली है।
पुलिसिया दबाव में छोड़ा रास्ता
पुलिस के अनुसार, 13 जनवरी को एसएसपी आवास के पास से हुए इस सनसनीखेज अपहरण के बाद से ही पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही थीं। मंगलवार तड़के करीब चार बजे, हजारीबाग जिले के चौपारण-बरही खंड के बीच जीटी रोड पर अपहरणकर्ता कैरव को छोड़कर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि पुलिस की बढ़ती दबिश और संभावित रूटों पर कड़ी घेराबंदी के कारण अपहरणकर्ता कैरव को कहीं और शिफ्ट करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और उन्हें छोड़ना ही बेहतर समझा।
बालकनी में आए कैरव: परिवार ने जताया आभार
मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे देवांग गांधी अपने पुत्र कैरव के साथ आवास की बालकनी में नजर आए। उन्होंने हाथ जोड़कर मीडिया, पुलिस प्रशासन और शहरवासियों का धन्यवाद किया।
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देवांग गांधी का बयान: “बीते 14 दिन हमारे परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक थे। जमशेदपुर के लोगों की प्रार्थनाएं और समर्थन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत बनी।”
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सस्पेंस बरकरार: कैरव गांधी ने भी हाथ जोड़कर सभी का आभार जताया, लेकिन अपनी आपबीती या अपहरण से जुड़ी किसी भी जानकारी पर फिलहाल चुप्पी साधे रखी।
अनसुलझे सवाल और विधायक की मुलाकात
कैरव की सुरक्षित वापसी के बावजूद कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गांधी परिवार से मुलाकात की और उनकी सुरक्षित वापसी पर खुशी जताई। हालांकि, उन्होंने भी कहा कि पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आना अभी बाकी है।
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पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की गई है, जिससे शहर में इस बात की चर्चा है कि क्या इसके पीछे कोई गुप्त समझौता हुआ है या वाकई यह पूरी तरह पुलिस के दबाव का नतीजा है।



