Chaibasa News: पश्चिम सिंहभूम जिले के सुदूरवर्ती सारंडा क्षेत्र स्थित छोटानागरा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी सांगठनिक मजबूती और स्थानीय अधिकारों को लेकर बिगुल फूंक दिया है। सोमवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं ने आगामी चुनावों और पेसा कानून (PESA Act) के कार्यान्वयन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की। बैठक की कमान संभालते हुए पूर्व जिला परिषद सदस्य बामिया माझी ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब ग्राम सभाएं अपने अधिकारों का प्रयोग कर जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ रोजगार पर भी अपना दावा ठोकेंगी।

खदानों में रोजगार पर ग्राम सभा का होगा दावा

बैठक को संबोधित करते हुए बामिया माझी ने पेसा कानून का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में यह कानून लागू होने के बाद अब स्थानीय बेरोजगार युवक-युवतियों के पास सुनहरा अवसर है। किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुवा और चिड़िया जैसी बड़ी खदानों में अब ग्राम सभा के माध्यम से ही रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांवों में जाकर लोगों को उनके इन अधिकारों के प्रति जागरूक करें ताकि खदानों का लाभ स्थानीय मूलवासियों को मिल सके।

मतदाता सूची और वन पट्टा पर जोर

राजनीतिक तैयारियों पर चर्चा करते हुए बामिया माझी ने बूथ स्तर पर बीएलओ-2 (BLO-2) की नियुक्ति को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हर युवक-युवती का नाम मतदाता सूची में शामिल कराया जाए ताकि लोकतंत्र के महापर्व में कोई पीछे न छूटे। इसके अलावा, वन ग्राम के निवासियों को वन पट्टा दिलाने की मांग को राज्य सरकार तक मजबूती से पहुंचाने का संकल्प भी लिया गया।

बैठक में कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम

छोटानागरा पंचायत समिति के अध्यक्ष गुरा मुर्मू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सारंडा क्षेत्र के तमाम दिग्गज कार्यकर्ता और मुंडा-मानकी शामिल हुए। बैठक में मंगल देवगम, सोहन मांझी और जेना वाडिंग समेत बड़ी संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही। सारंडा के इस बीहड़ इलाके में झामुमो की यह सक्रियता आने वाले दिनों में क्षेत्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है।

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