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India News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके दिशोम गुरु शिबू सोरेन का 81 वर्ष की आयु में सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से किडनी संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे और बीते कई सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। उनके निधन से झारखंड ही नहीं, देशभर की राजनीति में शोक की लहर फैल गई है।
शिबू सोरेन को राष्ट्र का अंतिम सलाम, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार, देशभर में शोक की लहर
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता की मृत्यु की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “आज मैं शून्य हो गया हूं… गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए।” जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, झारखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, सीएम हेमंत सोरेन से की बात
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उनका पूरा जीवन जनजातीय समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा, जिसके लिए वे सदैव याद किए जाएंगे।@HemantSorenJMM @JMMKalpanaSoren pic.twitter.com/ts5X0C3EiM
— Narendra Modi (@narendramodi) August 4, 2025
पूर्व सीएम शिबू सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, कि शिबू सोरेन एक जमीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में ऊंचाइयों को छुआ। वे आदिवासी समुदायों, गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित थे। उनका निधन दुखद है। हेमंत सोरेन से फोन पर बात की और संवेदना प्रकट की।
झारखंड में तीन दिन का राजकीय शोक
झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के सम्मान में राज्य में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। इस अवधि में कोई भी सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा और सभी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। सोमवार शाम झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सभी सरकारी कार्यालय 4 और 5 अगस्त को बंद रहेंगे।
देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
President Droupadi Murmu visited Sir Ganga Ram Hospital, New Delhi and paid last respects to Shri Shibu Soren. She offered her condolences to his son and Chief Minister of Jharkhand Shri Hemant Soren. pic.twitter.com/b7Z5feeENn
— President of India (@rashtrapatibhvn) August 4, 2025
शिबू सोरेन के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गहरा दुख जताया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “श्री शिबू सोरेन जी का निधन सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बड़ी क्षति है। उन्होंने झारखंड राज्य के निर्माण और आदिवासी अस्मिता के लिए जीवन भर संघर्ष किया।”
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिबू सोरेन जी के निधन की सूचना अत्यंत दु:खद है। झारखंड में जनजातीय समाज के अधिकारों और उनके सशक्तीकरण के लिए उन्होंने दशकों तक संघर्ष किया। अपने सहज व्यक्तित्व और सरल स्वभाव से वे जन-जन से जुड़े। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान…
— Amit Shah (@AmitShah) August 4, 2025
गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मायावती, लालू प्रसाद यादव समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने शिबू सोरेन के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्यसभा और विधानसभा ने दी अंतिम श्रद्धांजलि
राज्यसभा में भी शिबू सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। उपसभापति हरिवंश ने सभा की कार्यवाही की शुरुआत में दो मिनट का मौन रखवाया। इसके बाद सोमवार को कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
वहीं झारखंड विधानसभा में भी दिन की शुरुआत में ही दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि दी गई। स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने उन्हें झारखंड का मार्गदर्शक बताया और उनके निधन को राज्य के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर दिल्ली से रांची लाया गया है। झारखंड के लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़े। उनके पार्थिव शरीर को पहले मुख्यमंत्री आवास, फिर झामुमो कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा (हजारीबाग) में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
शिबू सोरेन: एक जीवन, एक आंदोलन
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को हजारीबाग जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन मांझी एक शिक्षक थे और पढ़े-लिखे आदिवासियों में गिने जाते थे। 1972 में शिबू सोरेन ने ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ की स्थापना की और आदिवासियों के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और पृथक राज्य की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।
उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की, हालांकि किसी भी कार्यकाल को वे पूरा नहीं कर सके। इसके अलावा वे आठ बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा सांसद रहे। केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी उन्होंने काम किया। वन अधिकार अधिनियम और भूमि अधिग्रहण कानून में उनका बड़ा योगदान रहा।
उनकी राजनीतिक यात्रा जमीनी स्तर से शुरू होकर सत्ता के शिखर तक पहुंची, लेकिन वे हमेशा आदिवासी समाज और आम जनता के हितों के लिए संघर्षरत रहे। वे झारखंड में ‘गुरुजी’ और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय रहे।
एक युग का अंत
शिबू सोरेन का जाना झारखंड की राजनीति के एक युग के अंत जैसा है। उनका संघर्ष, नेतृत्व और समाज के प्रति समर्पण भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। उनकी विरासत को उनके पुत्र और झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगे बढ़ा रहे हैं।

