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बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Ranchi झारखंड में होने जा रहे नगर निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने एक चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में करीब 18 साल बाद ‘शहर की सरकार’ चुनने के लिए मतदाता EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का बटन नहीं दबाएंगे, बल्कि मतपत्र (बैलेट पेपर) पर मुहर लगाकर अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। आयोग के इस फैसले ने न सिर्फ मतदान की प्रक्रिया बदल दी है, बल्कि प्रशासनिक चुनौतियों को भी कई गुना बढ़ा दिया है।
क्यों खास है बैलेट पेपर की वापसी?
आयोग के इस फैसले के बाद राज्य में 2008 वाली चुनावी व्यवस्था फिर से लौट आई है। साल 2008 के बाद हुए पिछले दो निकाय चुनावों में EVM का इस्तेमाल किया गया था, जिससे नतीजे कुछ ही घंटों में आ जाते थे। लेकिन इस बार आयोग ने फिर से कागजी मतदान प्रणाली को अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया भले ही धीमी हो, लेकिन यह स्थानीय स्तर पर पारंपरिक पारदर्शिता की ओर एक कदम है।
महापौर और पार्षद के लिए अलग-अलग रंग के मतपत्र
इस बार मतदाताओं के लिए प्रक्रिया थोड़ी जटिल होगी। मतदान केंद्र पर मतदाताओं को दो अलग-अलग मतपत्र दिए जाएंगे:
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महापौर/अध्यक्ष पद के लिए एक बैलेट पेपर।
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वार्ड पार्षद पद के लिए दूसरा बैलेट पेपर। मतदाताओं को दोनों मतपत्रों पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने मुहर लगाकर उन्हें एक ही बैलेट बॉक्स में डालना होगा। इस प्रक्रिया में मतदाताओं को काफी सतर्क रहना होगा ताकि उनका वोट अमान्य न हो जाए।
नतीजों के लिए 72 घंटे का लंबा इंतजार
EVM से होने वाले चुनाव में जहाँ दोपहर तक तस्वीर साफ हो जाती थी, वहीं बैलेट पेपर की गिनती में समय लगेगा। सूत्रों के मुताबिक, मतपत्रों की छंटनी और फिर गिनती में करीब 72 घंटे यानी 3 दिन का समय लग सकता है। इससे उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की बेचैनी बढ़ना तय है। मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी संख्या में कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
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कुल मिलाकर, झारखंड का यह नगर निकाय चुनाव न केवल लोकतंत्र का उत्सव होगा, बल्कि उम्मीदवारों के धैर्य की भी बड़ी परीक्षा साबित होगा। 23 फरवरी को होने वाले मतदान के बाद 27 फरवरी तक नतीजों का इंतजार करना होगा।

