Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आमजन के लिए सुलभ बनाने को लेकर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शनिवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक में उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है।

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने प्रोजेक्ट उल्लास के तहत मिर्गी रोगियों की पहचान और उनके समुचित इलाज को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि नियमित शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जाए तथा व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अस्पतालों में डायलिसिस सुविधाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में यह सेवा बाधित नहीं होनी चाहिए और मेंटेनेंस कार्य इस तरह किया जाए कि मरीजों को असुविधा न हो।

घाटशिला अस्पताल के शिशु केयर यूनिट में पिछले एक वर्ष में 11 नवजात शिशुओं की मौत पर चिंता जताते हुए उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को कारणों की गहन जांच कर मूल समस्याओं को दूर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत हैं और इसमें सुधार के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

कुपोषण उपचार केंद्रों में कम बेड ऑक्यूपेंसी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं संवेदनशील स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए तथा लाभार्थियों को काउंसलिंग के माध्यम से जागरूक किया जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार न हो।

टीकाकरण की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को घर-घर जाकर सत्यापन करने और छूटे हुए लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करने को कहा। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया, विशेष रूप से जुगसलाई क्षेत्र में प्रगति बढ़ाने को कहा गया।

संस्थागत प्रसव को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में हर प्रसव अस्पताल में ही हो, यह सुनिश्चित किया जाए। घरों में हुए प्रसव के मामलों का केस स्टडी के माध्यम से विश्लेषण कर बोड़ाम और डुमरिया क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया गया। साथ ही गुड़ाबांदा के बनमाकड़ी पंचायत सहित सभी पंचायतों में ममता वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

लिंगानुपात में गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए उपायुक्त ने पटमदा और घाटशिला प्रखंड में विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और झोला छाप चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

बैठक में डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता, नियमित फॉगिंग और जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी उन्मूलन अभियान और एनीमिया मुक्त भारत अभियान की भी समीक्षा की गई तथा इन योजनाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सभी अधिकारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और लापरवाही बरतने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, डॉ. जोगेश्वर प्रसाद, डॉ. रंजीत पांडा, डॉ. ए. मित्रा, डॉ. मृत्युंजय धावड़िया, डॉ. ओ.पी. केशरी सहित सभी एमओआईसी, एसीएमओ, डीपीसी, डीपीएम, डीडीएम, बीएएम, बीपीएम, बीडीएम एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

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