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World News: संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा वर्ल्ड अर्बनाइजेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2025 रिपोर्ट ने दुनिया के शहरों की रैंकिंग ही बदल दी है। नई गणना पद्धति के बाद इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता को दुनिया का सबसे बड़ा शहर घोषित किया गया है। रिपोर्ट में यह साफ दिखता है कि दुनिया में शहरीकरण अब एशिया पर आकर टिक गया है।
जकार्ता ने टोक्यो को पीछे छोड़ा
रिपोर्ट बताती है कि दुनिया की 8.2 अरब आबादी में से करीब 3.7 अरब लोग शहरों में बस चुके हैं। यह संख्या 1950 के सिर्फ 20 प्रतिशत की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है। नई “डिग्री ऑफ अर्बनाइजेशन” पद्धति में आबादी को भौगोलिक घनत्व के आधार पर मापा गया। इसी बदलाव ने टोक्यो को शीर्ष स्थान से हटाकर जकार्ता को नंबर-1 बना दिया। जकार्ता की आबादी करीब 4.19 करोड़ पहुंच चुकी है—जो किसी भी शहर से ज्यादा है।
एशिया का दबदबा, दिल्ली और कोलकाता भी टॉप-10 में
टॉप-10 दुनिया के सबसे बड़े शहरी समूहों में से नौ एशिया में हैं। ढाका दूसरे नंबर पर है, जहां 3.66 करोड़ लोग रहते हैं। टोक्यो तीसरे पर खिसक गया है, जबकि भारत की दिल्ली 3.02 करोड़ के साथ चौथे स्थान पर है। कोलकाता भी 2.25 करोड़ आबादी के साथ इस सूची में शामिल है। सिर्फ मिस्र की राजधानी काहिरा ही ऐसा शहर है जो एशिया से बाहर होते हुए भी टॉप-10 में जगह बनाए हुए है।
इतिहास से आज तक: शहरों की बदलती कहानी
रिपोर्ट यह भी बताती है कि इतिहास में शहरों का विकास कैसे हुआ। जेरिको से लेकर रोम, बगदाद और फिर लंदन—हर दौर में कोई न कोई शहर दुनिया का केंद्र बना। 20वीं सदी में टोक्यो ने यह स्थान हासिल किया था, लेकिन अब एशिया की तेज़ आबादी वृद्धि, आर्थिक बदलाव और बड़े पैमाने पर ग्रामीण पलायन ने तस्वीर पलट दी है।
2050 तक और भी बड़े बदलाव की चेतावनी
यूएन का बड़ा संकेत यह है कि आने वाले 25 सालों में शहरों पर आबादी का दबाव और बढ़ेगा। अब से 2050 तक करीब 1 अरब लोग और शहरों की ओर बढ़ेंगे। भारत, पाकिस्तान और नाइजीरिया इस वृद्धि के मुख्य स्तंभ होंगे। रिपोर्ट बताती है कि जलवायु संकट, प्रदूषण, भीड़ और संसाधनों की कमी आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

