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तेहरान, (ईरान) | एजेंसी
पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक ’10 सूत्री शांति प्रस्ताव’ पेश किया है। पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव ने राजनयिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस समझौते की चौथी शर्त को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो संभवतः यह तय करेगी कि इस लंबी जंग में जीत किसकी हुई और हार किसकी। ईरान की मांग है कि विदेशों में जमी (Freeze) हुई उसकी तमाम संपत्तियों और अरबों डॉलर के फंड को तत्काल रिहा किया जाए।
ईरान की 10 सूत्रीय मांग
1- अमेरिका भविष्य में दोबारा हमला न करने की गारंटी देगा
2- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण जारी रहेगा
3- ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को स्वीकार किया जाए
4- सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना
5- सभी द्वितीयत प्रतिबंधों को हटाना
6- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
7- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना
8- ईरान को पहुंचाए गए नुकसान के लिए मुआवजे का भुगतान
9- क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी
10- लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध (हिजबुल्लाह) समेत सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति
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ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इन 10 सूत्रों को ‘विजय का प्रस्ताव’ करार दिया है। तेहरान का तर्क है कि युद्ध के मैदान में उसकी स्थिति मजबूत है, इसलिए अब शांति की शर्तें भी उसी के हिसाब से तय होनी चाहिए। ईरान ने अमेरिका के 45 दिनों के अस्थायी सीजफायर के विकल्प को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि उसे केवल स्थायी शांति चाहिए, न कि समय काटने वाला कोई अस्थायी समझौता। अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि वे इन शर्तों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक मुद्दा बना हुआ है। ईरान इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर अपना पूर्ण संप्रभु अधिकार चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, यदि अमेरिकी राष्ट्रपति दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा करते हैं, तो ईरान अगले 14 दिनों तक जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने को तैयार है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का हवाला देते हुए ईरान का दावा है कि होर्मुज की कम चौड़ाई के कारण यहां ‘इंटरनेशनल वॉटर्स’ के लिए जगह कम है, जो उसे इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त देती है।
वर्तमान में इस जटिल स्थिति को सुलझाने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अब सबकी नजरें 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं। यदि अमेरिका ईरान की इन अधिकांश शर्तों, विशेषकर संपत्ति की रिहाई और होर्मुज पर नियंत्रण को स्वीकार कर लेता है, तो यह मध्य पूर्व में युद्ध की समाप्ति की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। अन्यथा, इस क्षेत्र में तनाव के बादल और अधिक गहरे हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट बढ़ना तय है।
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