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इस्लामाबाद, (पाकिस्तान) | एजेंसी
पाकिस्तान में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का सीधा और गहरा असर दिखने लगा है। देश की पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था इस युद्ध के कारण वेंटिलेटर पर पहुंच गई है। बढ़ती महंगाई और भीषण आर्थिक संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई कड़े और अभूतपूर्व उपायों का एलान किया है। शहबाज सरकार ने फैसला लिया है कि देश के सभी मंत्रियों को अगले छह महीने तक वेतन (Salary) नहीं मिलेगा। इससे पहले केवल दो महीने का वेतन रोकने का विचार था, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।
राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम शहबाज शरीफ ने माना कि देश बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। दो दिन पहले पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाकर कीमतें 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थीं, जिसका देश भर में भारी विरोध हुआ। जनआक्रोश को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स में 80 रुपये की कटौती की है। अब पाकिस्तान में पेट्रोल 378 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। हालांकि, हाई-स्पीड डीजल की बढ़ी हुई कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर पर ही स्थिर रहेगी।
होर्मुज की नाकेबंदी और तेल का खेल — शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने की वजह से दुनियाभर में पेट्रोलियम सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हुई है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन हफ्तों से तेल की कीमतें रोजाना बढ़ रही थीं, लेकिन सरकार ने आम आदमी की मुश्किलों को देखते हुए इसका पूरा बोझ जनता पर नहीं डाला। सरकार ने इस दौरान करीब 129 अरब रुपये की सब्सिडी दी है।
गरीबों और किसानों को ‘मरहम’ — आर्थिक बोझ को कम करने के लिए शहबाज सरकार ने कुछ राहतों का भी एलान किया है। मोटरसाइकिल चालकों को पेट्रोल पर 100 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी। छोटे किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा, पाकिस्तान रेलवे के इकोनॉमी क्लास के किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला किया गया है। पीएम ने कहा कि ये नई कीमतें कम से कम अगले एक महीने तक स्थिर रहेंगी।
अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें आज 7 फीसदी की बढ़त के साथ 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। इस युद्ध का असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ रहा है, जहां भारत ने भी हाल ही में स्पेशल एक्साइज ड्यूटी घटाकर तेल की कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया है।

