Khonz, (Iran): ईरान के फार्स प्रांत का शांत इलाका ‘खोन्ज’ अचानक सुर्खियों में आ गया है। 3 मार्च 2026 की उस घड़ी जब लोग अपने काम में मशगूल थे, अचानक जमीन कांपने लगी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने पुष्टि की कि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 थी और केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। लेकिन यह सिर्फ एक साधारण भूकंप नहीं था; इसके पीछे एक ऐसी चर्चा शुरू हो गई जिसने वैश्विक राजनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
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जैसे ही भूकंप के झटके महसूस किए गए, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कयास लगने लगे कि क्या ईरान ने चुपके से कोई परमाणु परीक्षण कर लिया है? दरअसल, ईरान के सर्वोच्च नेता के करीबी मोहम्मद-जवाद लारीजानी के उस हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “जरूरत पड़ने पर ईरान मात्र 24 घंटे में सैन्य परमाणु क्षमता हासिल कर सकता है।”
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?— वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इन दावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। विशेषज्ञों का तर्क है कि परमाणु विस्फोट और प्राकृतिक भूकंप की तरंगों (Seismic Waves) में जमीन-आसमान का फर्क होता है। परमाणु परीक्षण से उठने वाली लहरें ‘एक्सप्लोसिव’ होती हैं, जबकि प्राकृतिक भूकंप ‘टेक्टॉनिक’ हलचल का नतीजा होते हैं।
अगर यह परमाणु परीक्षण होता, तो इसकी तीव्रता 4.3 से कहीं ज्यादा होती। मिसाल के तौर पर, 2016 में उत्तर कोरिया के परीक्षण ने 5.1 की तीव्रता पैदा की थी। इसके अलावा, रेडियोएक्टिव लीक को रोकने के लिए ऐसे परीक्षणों को बहुत गहराई में किया जाता है।
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ईरान की परमाणु ताकत का सच— भले ही यह भूकंप प्राकृतिक हो, लेकिन अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की रिपोर्ट डराने वाली है। उनके अनुसार, ईरान के पास इस समय 460 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम है, जो 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान हथियार बनाने की दहलीज पर खड़ा तो है, लेकिन फिलहाल उसने सीमा लांघी नहीं है। खोन्ज का यह भूकंप फिलहाल कुदरती ही नजर आता है, लेकिन ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं ने दुनिया की नींद जरूर उड़ा दी है।



