Tehran, Iran — ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) का रास्ता बंद कर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में भूचाल ला दिया है। इस रणनीतिक जलमार्ग के बंद होते ही वैश्विक तेल सप्लाई ठप हो गई है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ा है। सोमवार को बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 29 फीसदी तक का ऐतिहासिक उछाल देखा गया। इस संकट ने वॉशिंगटन से लेकर लंदन और पेरिस तक हड़कंप मचा दिया है।

ट्रंप प्रशासन में बेचैनी और ‘प्लान-बी’— दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस हलचल से खासे परेशान हैं। व्हाइट हाउस और पेंटागन में इस ‘तेल के खेल’ को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन बैठकें जारी हैं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) का ताला खोलने की तैयारी कर रहा है ताकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखा जा सके। अमेरिका इस संकट को ‘अल्पकालिक’ बताकर बाजार को शांत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बीच ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

G-7 देशों की इमरजेंसी बैठक— इस बीच, दुनिया के सात सबसे ताकतवर देशों (G-7) के वित्त मंत्रियों ने एक इमरजेंसी वर्चुअल बैठक की। फ्रांस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और वर्ल्ड बैंक के प्रमुखों ने भी हिस्सा लिया। साझा बयान में संकेत दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर G-7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार को बाजार में उतारने के लिए तैयार हैं। फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने साफ किया कि सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए वे कोई भी बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज का रास्ता?— दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल और इतनी ही मात्रा में लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि होर्मुज में जोखिम अब “महत्वपूर्ण और लगातार” बना हुआ है। इतिहास में यह पहली बार है जब दुनिया की एक-तिहाई ऊर्जा सप्लाई सीधे तौर पर मिसाइलों और ड्रोनों के निशाने पर है।

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अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और G-7 मिलकर बाजार में तेल की किल्लत दूर कर पाएंगे, या ईरान का यह दांव पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ देगा। यदि होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो वैश्विक मंदी का खतरा और गहरा सकता है।

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