Health News: क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन महिलाओं में कमजोरी, सामाजिक असमानता और हृदय रोग (सीवीडी) के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हो सकता है। ताजा अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। इस शोध में 37 से 84 वर्ष की उम्र की 2,000 से अधिक महिलाओं के ब्लड सैंपल का विश्लेषण किया गया। इन सैंपल में 74 इन्फ्लेमेशन से संबंधित प्रोटीनों की जांच की गई। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि शरीर में इन्फ्लेमेशन कैसे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को प्रभावित करता है। शोधकर्ताओं ने ऐसे 10 प्रोटीनों की पहचान की जो न सिर्फ कमजोरी और सामाजिक वंचना से जुड़े पाए गए, बल्कि इनमें से चार प्रोटीन (टीएनएफएसएफ14, एचजीएफ, सीडीसीपी1 और सीसीएल11) हृदय रोग के खतरे से भी सीधे जुड़े मिले।

विशेष रूप से सीडीसीपी1 नामक प्रोटीन का दिल की धमनियों के अवरोध और संकुचन से गहरा संबंध सामने आया। शोध से यह संकेत मिलता है कि ये प्रोटीन सामाजिक असमानता, उम्र बढ़ने और हृदय रोग के बीच एक बायोलॉजिकल लिंक की तरह काम कर सकते हैं। यह अध्ययन केवल एक समूह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे अलग आबादी पर भी दोहराया गया, जिससे इसके निष्कर्षों की वैधता और व्यापकता को पुष्टि मिली। किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च एसोसिएट डॉ. यू लिन के अनुसार, इन प्रोटीनों की पहचान से यह स्पष्ट हुआ कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारकों के बीच एक साझा जैविक मार्ग मौजूद हो सकता है।

वहीं, मॉलिक्यूलर एपिडेमियोलॉजी की सीनियर लेक्चरर डॉ. क्रिस्टीना मेन्नी का मानना है कि सामाजिक तनाव इन्फ्लेमेशन को बढ़ाता है, जो आगे चलकर हृदय रोग की आशंका को जन्म देता है। यदि भविष्य में इन निष्कर्षों की और पुष्टि होती है, तो इन्फ्लेमेशन को कम करने वाली चिकित्सा और सामाजिक असमानताओं को दूर करने वाली नीतियां मिलकर कमजोर आबादी में हृदय रोग के जोखिम को प्रभावी ढंग से घटा सकती हैं।

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