New Delhi: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चुनाव प्रबंधन के मामले में उसका कोई सानी नहीं है। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM-2026) के समापन पर एक ऐतिहासिक सहमति बनी है। अब दुनिया के 42 से अधिक देश अपनी मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए भारत की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पद्धति को अपनाएंगे।

‘दिल्ली घोषणा 2026’ और पांच मजबूत स्तंभ

सम्मेलन के अंतिम दिन ‘दिल्ली घोषणा 2026’ को साझा किया गया, जो वैश्विक चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बताया कि प्रतिभागी देश अब पांच प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग करेंगे:

  1. मतदाता सूची की शुद्धता (SIR तकनीक द्वारा)

  2. चुनाव संचालन में पारदर्शिता

  3. शोध एवं प्रकाशन

  4. अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग

  5. चुनाव कर्मियों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

क्यों हिट हुआ भारतीय SIR मॉडल?

भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision) तकनीक फर्जी मतदाताओं को हटाने और पात्र नागरिकों को जोड़ने में दुनिया की सबसे सटीक प्रक्रिया मानी गई है। विदेशी प्रतिनिधियों ने माना कि पारदर्शी चुनाव के लिए हर मतदाता के पास फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य है, और भारत ने इस दिशा में मिसाल कायम की है।

लोकतंत्र का वैश्विक महाकुंभ

इस सम्मेलन में 42 देशों के चुनाव निकायों और 27 देशों के मिशन प्रमुखों सहित लगभग 1,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जोर देकर कहा कि कानून के दायरे में तैयार शुद्ध मतदाता सूची ही किसी भी लोकतंत्र की असली नींव होती है।

इस वैश्विक सफलता को देखते हुए सभी देशों ने निर्णय लिया है कि वे समय-समय पर अपनी प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसी सिलसिले में 3 से 5 दिसंबर 2026 को नई दिल्ली में दोबारा बैठक आयोजित की जाएगी। यह स्पष्ट है कि चुनावी शुद्धता के मामले में भारत अब दुनिया का ‘विश्व गुरु’ बनकर उभरा है और उसकी तकनीक अब अंतरराष्ट्रीय मानक बन चुकी है।

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