New Delhi: भारतीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए 27 जनवरी का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। इस एक हस्ताक्षर ने भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए यूरोप के 27 देशों के दरवाजे खोल दिए हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह समझौता न केवल व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि देश के करोड़ों बुनकरों और कारीगरों की किस्मत बदल देगा।
कपड़ा उद्योग में आएगा ‘निर्यात का तूफान’
वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ को लगभग 7 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात करता है, जिसके अब बढ़कर 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब तक भारतीय उत्पादों पर लगने वाला 12 प्रतिशत का आयात शुल्क (Import Duty) खत्म हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद अब बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। गौरतलब है कि बांग्लादेश ‘जीरो ड्यूटी’ का लाभ उठाकर अब तक बढ़ी हिस्सेदारी पर कब्जा जमाए हुए था, लेकिन अब भारत भी उसी बराबरी पर खड़ा होगा।
70 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार
भारत में कृषि के बाद कपड़ा उद्योग ही सबसे ज्यादा रोजगार देता है। इस समझौते से होम फर्निशिंग, गारमेंट्स और हैंडloom सेक्टर में भारी निवेश की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात में होने वाली इस भारी वृद्धि से अगले कुछ वर्षों में 60 से 70 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
कार्बन टैक्स की टेंशन भी हुई खत्म
यूरोपीय संघ के कड़े कार्बन टैक्स (CBAM) नियमों को लेकर भारतीय निर्यातक चिंतित थे। लेकिन वाणिज्य सचिव ने साफ किया है कि समझौते के तहत अब भारतीय एजेंसियां ही कार्बन उत्सर्जन का सत्यापन करेंगी। इससे हमारे व्यापारियों को यूरोप की जटिल कागजी कार्रवाई और अतिरिक्त टैक्स से मुक्ति मिलेगी। यह समझौता न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को ग्लोबल ब्रांड बनाएगा, बल्कि भारत के व्यापार घाटे को कम करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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