Bihar News: बिहार के भागलपुर जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। यहां मतदाता सूची में दो पाकिस्तानी महिलाओं के नाम दर्ज पाए गए। गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तुरंत कार्रवाई की और जिला प्रशासन को उनके नाम हटाने का आदेश दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह महिलाएं न केवल वोटर बनी थीं बल्कि कई बार मतदान भी कर चुकी थीं। इतना ही नहीं, इनके पास आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड जैसे अहम भारतीय दस्तावेज भी मौजूद थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ये फर्जीवाड़ा कैसे हुआ और कौन लोग इसमें शामिल हैं।
जिला प्रशासन ने बीएलओ के माध्यम से फॉर्म-7 भरकर इन महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार व जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और पूरे प्रकरण की गहन जांच का आदेश दिया गया है।
मामला कैसे खुला?
भागलपुर प्रशासन की जांच में सामने आया कि इनमें से एक महिला इमराना खानम उर्फ इमराना खातून पाकिस्तानी मूल की है। इमराना फिलहाल शाहकुंड में शिक्षिका हैं। सोमवार को जब पत्रकार उनके घर पहुंचे तो वह बिस्तर पर लेटी थीं। उन्होंने दावा किया कि वे बीमार हैं और इसी वजह से स्कूल नहीं जा पा रही हैं।
शिक्षा विभाग भी सकते में
इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि नगर निगम विद्यालय अवर निरीक्षक को जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इमराना के पति इबनुल हक को वर्ष 2006 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से सम्मानित किया गया था। उनका निधन 2018 में हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमराना उनकी दूसरी पत्नी थीं और उनकी कोई संतान नहीं है।
विदेशी पासपोर्ट से खुला राज
इमराना का पाकिस्तानी पासपोर्ट नंबर 981093/1956 सामने आया है। इसके अनुसार उनका जन्म जनवरी 1956 में हुआ और वे तीन साल के वीजा पर पाकिस्तान से भारत आई थीं। जबकि शिक्षा विभाग के दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 2 मार्च 1966 दर्ज है। यानी एक तरफ पासपोर्ट बताता है कि वह 1956 में पैदा हुईं, वहीं दूसरे दस्तावेज में 1966 लिखा है। इस विसंगति से साफ है कि पहचान पत्र बनाते समय जन्मतिथि में गड़बड़ी की गई।
इमराना का पक्ष
पत्रकारों से बातचीत में इमराना ने खुद को भारतीय बताते हुए कहा कि उनका पालन-पोषण भीखनपुर में उनकी खाला गोशिया खानम ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पाकिस्तानी बताने के पीछे बीएलओ फरजाना खातून का हाथ है। इमराना के अनुसार फरजाना उनके ही घर में 40 वर्षों से किराए पर रह रही हैं और अब किराया भी नहीं देतीं। इसी विवाद के चलते उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।
पुलिस जांच जारी
भागलपुर एसएसपी हृदयकांत ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। अभी पुलिस यह भी खंगाल रही है कि इमराना और दूसरी महिला के पास आधार और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज कैसे पहुंचे।
उठे कई सवाल
इस मामले ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेशी नागरिक भारतीय वोटर सूची में कैसे शामिल हो गए और वर्षों तक वोट भी डालते रहे। अब गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग की पैनी नजर इस मामले पर है।



