Jammu, (India) | एजेंसी —
सिंधु जल संधि को लेकर भारत के बदलते और कड़े रुख के बीच जम्मू-कश्मीर से एक बड़ी रणनीतिक खबर सामने आई है। उत्तर कश्मीर के बारामुला जिले के उरी सेक्टर में स्थित 120 साल पुराने ऐतिहासिक ‘मोहरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट’ को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। करीब तीन दशकों से बंद पड़े इस संयंत्र को पुनर्जीवित करने का फैसला न केवल घाटी की बिजली जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। 1905 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे पुराने जलविद्युत संयंत्रों में से एक है, जो 1992 की भीषण बाढ़ के बाद से ठप पड़ा था।
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जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने इस प्रोजेक्ट के रेनोवेशन और अपग्रेडेशन के लिए हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आईआईटी रुड़की को विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अपडेट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में संस्थान की एक टीम ने घाटी का दौरा कर इसके डिजाइन और टर्बाइन क्षमता को लेकर आवश्यक सुझाव दिए हैं। 10.5 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा कनाडाई डिजाइन है, जिसमें पानी को टर्बाइन तक पहुंचाने के लिए लगभग 10-11 किलोमीटर लंबी लकड़ी की नहर (फ्लूम) का इस्तेमाल किया जाता था।
पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता, भारत का जल संसाधनों पर नियंत्रण
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। भारत का लक्ष्य 2035 तक अपनी जलविद्युत क्षमता को बढ़ाकर 11,000 मेगावाट करने का है। झेलम नदी पर स्थित इस पुराने प्रोजेक्ट को सक्रिय करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग और उन पर पूर्ण नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि झेलम नदी पर भारत की इस सक्रियता से पाकिस्तान की नींद उड़ना तय है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय ऊर्जा संतुलन और जल प्रवाह के प्रबंधन में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी साफ कर दिया है कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए ऐसी पुरानी और नई परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ऐतिहासिक ‘मोहरा’ प्रोजेक्ट का दोबारा सक्रिय होना कश्मीर की बिजली किल्लत को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक बनेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल एक बिजली घर है, बल्कि इंजीनियरिंग का एक ऐसा अद्भुत नमूना भी है जो अब आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर के विकास की नई इबारत लिखेगा।



