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नई दिल्ली | एजेंसी
ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर जो अनिश्चितता बनी है, उसे देखते हुए भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भारत खाद्य सुरक्षा, ईंधन आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। देश में खाद्यान्न और ऊर्जा उत्पादों का न केवल पर्याप्त भंडार है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता व्यवस्था भी कर ली गई है।
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खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में देश का खाद्यान्न भंडार तय मानकों से काफी अधिक और संतोषजनक स्थिति में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश के पास लगभग 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडार मौजूद है। कुल 602 लाख मीट्रिक टन का यह स्टॉक हमारी वास्तविक जरूरत से लगभग तीन गुना ज्यादा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को निरंतर सहायता दी जा रही है और खुला बाजार बिक्री योजना के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखा जा रहा है। इसके अलावा, राज्य एजेंसियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की नई खरीद भी शुरू कर दी है।
ईंधन के मोर्चे पर भी अच्छी खबर आई है। पश्चिम एशिया से एलपीजी लेकर आ रहे भारतीय ध्वज वाले जहाज ‘ग्रीन संघवी’ और ‘ग्रीन आशा’ पिछले दो दिनों में सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं है और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त खेप पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। तेल और गैस कंपनियां स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रही हैं ताकि वितरण सुचारु रहे और जमाखोरी या कालाबाजारी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।
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आम जनता की सुविधा के लिए एलपीजी वितरण केंद्रों पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। देश में प्रतिदिन करीब 50 लाख गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है, जिसमें 97 प्रतिशत बुकिंग ऑनलाइन माध्यम से हो रही है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 90 प्रतिशत वितरण में ओटीपी आधारित सत्यापन लागू है। वितरण प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए वितरक छुट्टियों और रविवार के दिन भी कार्य कर रहे हैं, ताकि किसी भी घर में चूल्हा न बुझे।

