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चैनपुर/गुमला :- रविवार को चैनपुर क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब स्थानीय पत्रकारों को गुप्त सूचना मिली कि संत अन्ना बालिका उच्च विद्यालय के छात्रावास में रहने वाली नाबालिग छात्राओं को मजदूरों की तरह खेतों में काम कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही पत्रकार मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने 10 से 15 वर्ष की बच्चियों को धान की कटाई और ढोवाई करते पाया।पत्रकारों द्वारा बच्चियों से पूछताछ किए जाने पर उन्होंने धीमी आवाज में बताया कि यह काम सिस्टर सिसिलिया, सिस्टर ज्योति और सिस्टर हेलेन के कहने पर कराया जा रहा था। बच्चियों ने यह भी बताया कि मजदूरी के दौरान शिक्षिका अमला भी खेत में मौजूद थीं। जब पत्रकारों ने स्कूल व छात्रावास प्रबंधन से बात करनी चाही, तो सभी शिक्षिकाओं और सिस्टरों ने कोई भी जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकारों ने तत्काल इसकी सूचना प्रखंड प्रशासन, चैनपुर थाना, और अन्य संबंधित अधिकारियों को दी
सूचना मिलने के कुछ ही समय बाद प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चियों को स्कूल वाहन से छात्रावास वापस भेज दिया गया, जिससे वास्तविक जानकारी जुटाना कठिन हो गया। घटनास्थल पर पहुंचे चैनपुर थाना के एसआई अशोक कुमार ने स्कूल प्रबंधन को केवल अंतिम चेतावनी देकर छोड़ दिया, जिसके बाद प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेने के बजाय लीपापोती करने में लग गया है। बालिकाओं पर प्रबंधन द्वारा चुप रहने का दबाव भी बताया जा रहा है, जो घटना को और अधिक संदिग्ध बनाता है। यह पूरा प्रकरण बाल श्रम कानून, जेजे एक्ट, तथा बाल अधिकार संरक्षण कानून के स्पष्ट उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए और सभी आरोपितों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


