Bihar News: बिहार की राजनीति एक बार फिर चुनावी रंग में रंगने लगी है। विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखें भले ही अभी आधिकारिक तौर पर घोषित न हुई हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां पूरी रफ्तार से शुरू कर दी हैं। इस बार का चुनाव न सिर्फ जमीन पर, बल्कि आसमान में भी जोरदार होने वाला है। वजह है हेलिकॉप्टरों की बढ़ती मांग।

आसमान में गूंजेगा चुनावी शोर

सूत्रों के अनुसार, इस बार चुनाव प्रचार में करीब 20 हेलिकॉप्टर रोज़ाना पटना एयरपोर्ट के स्टेट हैंगर से उड़ान भरेंगे। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की होगी। भाजपा ने लगभग 12 से 13 हेलिकॉप्टर एडवांस में बुक कर लिए हैं। वहीं, एनडीए के दूसरे घटक जदयू के पास दो हेलिकॉप्टर होंगे। इन हेलिकॉप्टरों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य बड़े नेता प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में रैलियां करेंगे।

दूसरी ओर महागठबंधन ने भी अपनी रणनीति आसमान पर टिकाई है। आरजेडी और कांग्रेस ने दो-दो हेलिकॉप्टर बुक कराए हैं। इसके अलावा वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी एक हेलिकॉप्टर से चुनावी मैदान में उतरेंगे। यानी कुल मिलाकर विपक्ष भी पूरी ताकत से मुकाबला करने की तैयारी में है।

क्यों जरूरी है हेलिकॉप्टर प्रचार?

बिहार जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से विविध राज्य में सड़क मार्ग से एक ही दिन में 10 से 15 जनसभाएं करना लगभग असंभव है। ऐसे में हेलिकॉप्टर नेताओं के लिए वरदान साबित होते हैं। पिछली बार 2020 के चुनाव में तेजस्वी यादव ने हेलिकॉप्टर की मदद से रिकॉर्ड 19 जनसभाएं एक ही दिन में की थीं। यही वजह है कि इस बार भी सभी दल हवाई प्रचार पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

कितना होगा खर्च?

चुनाव के दौरान हेलिकॉप्टर की डिमांड बढ़ते ही किराया भी आसमान छूने लगता है। सामान्य दिनों में सिंगल इंजन हेलिकॉप्टर का किराया 1 से 2 लाख रुपये प्रति घंटा होता है। लेकिन चुनावी सीजन में यही किराया 3 से 4 लाख रुपये प्रति घंटा तक पहुंच जाता है। इसके साथ ही न्यूनतम 3 घंटे का चार्ज और 18% जीएसटी भी देना पड़ता है। ऐसे में एक हेलिकॉप्टर का रोज़ाना औसत खर्च लगभग 11 लाख रुपये बैठता है।

ग्लोबल फ्लाइट सर्विसेज पटना के मैनेजर देवेंद्र कुमार बताते हैं कि पिछली बार के चुनाव में आधा दर्जन हेलिकॉप्टर इस्तेमाल हुए थे, लेकिन इस बार संख्या तीन गुना बढ़कर करीब 20 हो गई है।

हाईटेक प्रचार और सोशल मीडिया का संगम

यह चुनाव सिर्फ हेलिकॉप्टरों तक सीमित नहीं रहेगा। सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार भी जोर-शोर से चल रहा है। लेकिन जमीन पर जनसभाओं की ताकत अभी भी सबसे ज्यादा असरदार मानी जाती है। यही वजह है कि हेलिकॉप्टरों को समय बचाने और अधिकतम जनता तक पहुंचने का सबसे बड़ा साधन माना जा रहा है।

चुनाव आयोग की पैनी नज़र

इतना भारी खर्च चुनाव आयोग की नजर से बच पाना आसान नहीं होगा। आयोग के पास चुनावी खर्च पर सख्त निगरानी की व्यवस्था है। इसलिए सभी दलों को अपने हवाई प्रचार का पूरा हिसाब देना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बिहार चुनाव में जितना पैसा आसमान से बरसेगा, उतना पहले कभी नहीं हुआ।

नतीजा क्या होगा?

हेलिकॉप्टर प्रचार न सिर्फ नेताओं को समय बचाने का मौका देगा, बल्कि यह मतदाताओं पर मनोवैज्ञानिक असर भी डालेगा। गांव-गांव और कस्बों के लोग जब नेताओं को हेलिकॉप्टर से उतरते देखेंगे तो माहौल खुद ही चुनावी रंग में डूब जाएगा। साफ है कि इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में आसमान भी उतना ही गूंजेगा जितना कि धरती।

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