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Ranchi : समाज में सामूहिक विवाह जैसी पहलें गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन रही हैं। इसी कड़ी में सोमवार को राजधानी रांची में मोमिन पंचायत इलाहीनगर द्वारा आयोजित आदर्श सामूहिक विवाह कार्यक्रम के तहत तीन अनाथ एवं आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों का निकाह संपन्न कराया गया। इन बच्चियों के पिता के निधन के बाद उनके विवाह की जिम्मेदारी परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी। आर्थिक कठिनाइयों के चलते विवाह की तिथि बार-बार टल रही थी, लेकिन मोमिन पंचायत ने आगे आकर इन बेटियों को सम्मानपूर्वक विदा किया।
कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था मोमिन अंसारी पंचायत की ओर से की गई। विवाह समारोह में उपहार स्वरूप पलंग, गद्दा, चार कुर्सियां, आवश्यक बर्तन और घरेलू सामान प्रदान किए गए, ताकि नई जिंदगी की शुरुआत में दूल्हा-दुल्हन को किसी तरह की परेशानी न हो। विवाह की रस्में क़ारी अब्दुल रसीद द्वारा शरीयत के अनुसार सम्पादित की गईं।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में पंचायत के प्रतिनिधि फिरोज़ जिलानी ने बताया कि तीनों दूल्हों—चान्हो निवासी गुलरेज़ अंसारी, सिल्ली निवासी मो. शमशेर और हुसीर निवासी रफ़ीक़ आलम ने सादगीपूर्ण माहौल में निकाह संपन्न किया। समारोह में स्थानीय समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं और पंचायत सदस्यों ने उपस्थित होकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया।
इस मौके पर हाजी अब्दुल हलीम ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि निकाह को आसान बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। दहेज और गरीबी की वजह से गरीब बेटियों की शादी में देरी होना बेहद दुखद है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक एकता और इंसानियत का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
पंचायत अध्यक्ष मो. हफ़ीज़ ने कहा कि यह पहल केवल शुरुआत है। आगे भी यदि कोई गरीब या जरूरतमंद परिवार मदद के लिए आएगा, तो पंचायत पूरी जिम्मेदारी के साथ सहयोग करेगी। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज को आगे बढ़कर ऐसे नेक कार्यों में योगदान देना चाहिए, क्योंकि सामूहिक विवाह न केवल आर्थिक बोझ को कम करता है बल्कि सामाजिक भाईचारे को भी मजबूत बनाता है।
कार्यक्रम में दीपाटोली सद्भावना पंचायत के संरक्षक मेराज खान सहित हाजी अबुल कलाम, अब्दुल हसीब, परवेज़ आलम, मुस्तकीम अंसारी, जुबैर आलम, खुर्शीद कुरैशी, सद्दाम अली, ज़हीर खान, अबू तलहा, शमीम अंसारी, हाजी मुमताज़, गुफरान आलम, इम्तियाज़ अख्तर, साबिर खान, ज़फ़ीर इक़बाल, मोहम्मद शफ़ीक़, मो. हैदर, क़ासिम अली, राघव इक़बाल, शाहबाज़ आलम और सरफ़राज़ अंसारी उपस्थित थे।
इस पहल ने समाज में एक प्रेरणादायक संदेश दिया है कि यदि सामूहिक सहयोग हो, तो कोई भी बेटी अपनी नई जिंदगी शुरू करने से वंचित नहीं रह सकती।

