Health News: छोटे बच्चों में अक्सर नाखून चबाने की आदत देखी जाती है। शुरुआती दौर में अभिभावक इसे एक सामान्य आदत मानकर टाल देते हैं, लेकिन यह धीरे-धीरे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह आदत न केवल बच्चे की मुस्कान बिगाड़ सकती है, बल्कि उन्हें गंभीर संक्रमण की ओर भी धकेल सकती है।
नाखून चबाने से होने वाले नुकसान
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दांतों और मसूड़ों पर प्रहार: लगातार नाखून चबाने से बच्चों के दांतों की संरचना (Structure) बिगड़ने लगती है। इससे दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं और मसूड़ों में सूजन या खून आने की समस्या पैदा हो सकती है।
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संक्रमण का सीधा रास्ता: नाखूनों के भीतर जमी गंदगी और बैक्टीरिया मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे गले में इंफेक्शन, मुंह के छाले और पेट की गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
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पाचन तंत्र में गड़बड़ी: कुछ बच्चे नाखून चबाते हुए उन्हें निगल भी जाते हैं। नाखून के ये सख्त टुकड़े पाचन तंत्र में रुकावट पैदा कर सकते हैं, जिससे गैस, कब्ज या आंतों में दर्द की समस्या हो सकती है।
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मानसिक तनाव का संकेत: बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि नाखून चबाना अक्सर मानसिक तनाव, घबराहट या चिंता (Anxiety) का परिणाम होता है। बच्चा जब खुद को असुरक्षित महसूस करता है, तो वह अनजाने में ऐसा करने लगता है।
कैसे छुड़ाएं यह आदत?
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प्यार से समझाएं: बच्चों पर चिल्लाने या उन्हें डांटने के बजाय सकारात्मक तरीके से इस आदत के नुकसान बताएं। घर में शांतिपूर्ण माहौल रखें ताकि बच्चा तनावमुक्त रहे।
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नाखूनों की सफाई: बच्चों के नाखूनों को नियमित रूप से काटें और उन्हें साफ रखें। छोटे नाखूनों को चबाना मुश्किल होता है।
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व्यस्त रखें: जब भी बच्चा खाली बैठता है, वह नाखून चबाने लगता है। उन्हें खेलकूद, चित्रकला या संगीत जैसी गतिविधियों में व्यस्त रखें ताकि उनका ध्यान इस आदत से हटे।
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विशेषज्ञ की सलाह: यदि यह आदत बहुत ज्यादा बढ़ गई है और बच्चा हमेशा चिंता में दिखता है, तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक या काउंसलर से सलाह लेने में संकोच न करें।
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