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Dispur: असम की राजनीति में मंगलवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में आयोजित एक भव्य समारोह में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस जीत के साथ ही हिमंता बिस्वा सरमा असम के इतिहास में लगातार दो बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं।
दिग्गजों का लगा जमावड़ा
शपथ ग्रहण समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। राज्यपाल ने रविवार को हिमंता को एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नियुक्त किया था।
पूर्वोत्तर में भाजपा के ‘शिल्पी’
हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर किसी मिसाल से कम नहीं है। 2015 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले हिमंता ने पूर्वोत्तर के सात राज्यों में भाजपा और एनडीए को मजबूत करने में ‘चाणक्य’ जैसी भूमिका निभाई। 2016 में उन्हें एनईडीए (NEDA) का संयोजक बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय दलों को जोड़कर भाजपा का आधार फैलाया।
उच्च शिक्षित और कुशल रणनीतिकार— हिमंता बिस्वा सरमा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत है:
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शिक्षा: गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए।
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कानून: गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी।
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पीएचडी: 2006 में गुवाहाटी विश्वविद्यालय से ‘पूर्वोत्तर परिषद’ के विकास पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत भी की थी।
अजेय गढ़: जालुकबारी
उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। 2001 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर जालुकबारी सीट से विधायक बने। दिलचस्प बात यह है कि तब से लेकर आज तक वे इस सीट पर अजेय बने हुए हैं। 2021 में पहली बार सीएम बनने के बाद, 2026 में उनके नेतृत्व में एनडीए की यह लगातार तीसरी सरकार है (2016 में पहली बार सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सरकार बनी थी)।
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