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India News: हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में रविवार को मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। आज सुबह से ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मंडी, कांगड़ा और सिरमौर जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है, वहीं चम्बा, कुल्लू, शिमला, सोलन, हमीरपुर, बिलासपुर सहित 9 जिलों में अगले 24 घंटे के लिए फ्लैश फ्लड की चेतावनी दी गई है।
मंडी में फिर फटा बादल, बह गई पुलिया
मंडी जिले के पधर उपमंडल के टिक्कन पंचायत स्थित सिलबधानी गांव में बीती रात एक बार फिर बादल फटा। इससे क्षेत्रीय नाले में अचानक बाढ़ आ गई और दो पुलिया बह गईं। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन शुरू कर दिया है। हालांकि इस घटना में कोई जान-माल की क्षति नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोग भयभीत हैं।
कांगड़ा में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज
मौसम विभाग के अनुसार, बीते 24 घंटे में सबसे अधिक बारिश कांगड़ा जिले के नगरोटा सुरियां में 102 मिमी दर्ज की गई है। अन्य इलाकों में ऊना (62 मिमी), धर्मशाला (61 मिमी), कटुआला व घमरूर (40 मिमी), बरठीं (38 मिमी), सुजानपुर टीहरा (36 मिमी), भराड़ी (35 मिमी), नादौन (30 मिमी) और मंडी में 21 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग ने 7 जुलाई को बहुत भारी वर्षा के लिए ऑरेंज अलर्ट और 8-10 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी किया है। 11-12 जुलाई को सामान्य बारिश की संभावना जताई गई है।
200 से ज्यादा सड़कें बंद, ट्रांसफॉर्मर और जल योजनाएं प्रभावित
प्रदेश में भारी बारिश के कारण 269 सड़कें, 285 बिजली ट्रांसफॉर्मर और 278 पेयजल योजनाएं बंद पड़ी हैं। अकेले मंडी जिले में 200 सड़कें, 236 ट्रांसफॉर्मर और सभी 278 जल योजनाएं ठप हो चुकी हैं, जिससे यह जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है।
15 दिनों में 74 मौतें, 37 लापता
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से 5 जुलाई तक बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और सड़क हादसों में अब तक 74 लोगों की जान जा चुकी है और 37 लोग लापता हैं। इस अवधि में प्रदेश को 566 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति हुई है। मंडी जिले में सबसे ज्यादा तबाही हुई है, जहां 30 जून को एक ही रात में बादल फटने की 12 घटनाएं सामने आईं। इसमें 14 लोगों की मौत हो गई और 31 लापता हो गए। कांगड़ा में 13 लोगों की जान गई, जिनमें 7 मौतें भूस्खलन और 2 बादल फटने से हुईं।
सैकड़ों मकान, दुकानें और पशुशालाएं बर्बाद
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 19 घर पूरी तरह ढह चुके हैं, 93 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 213 पशुशालाएं और 21 दुकानें भी तबाह हो चुकी हैं। कृषि और बागवानी को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। साथ ही 10,000 पोल्ट्री पक्षी और 253 मवेशी मारे गए हैं।
सड़क हादसों में भी गई कई जानें
फिसलन भरी सड़कों, टूटी पुलियों और लगातार हो रही बारिश के चलते अब तक सड़क हादसों में 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चम्बा में 6, मंडी, बिलासपुर और कुल्लू में 3-3 लोगों की मौत शामिल है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत संपर्क करें।

