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चैनपुर (गुमला): झारखंड के गुमला जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो कानून और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक लाचार पिता, जिसका आधा शरीर लकवा (Paralysis) के कारण साथ नहीं देता, वह अपनी लाठी के सहारे चैनपुर थाने की चौखट पर बार-बार मत्था टेक रहा है। उसकी बस एक ही मांग है— “मेरी बेटी वापस ला दो।” मालम गांव की प्रियंका एक्का, जो अपने घर के आंगन में मकई भून रही थी, उसे तस्करों ने बहला-फुसलाकर राजस्थान के किसी अनजान इलाके में बेच दिया है।
रांची घूमने का झांसा और फिर राजस्थान में सौदा; आरोपी अब भी पुलिस की पहुंच से दूर
परिजनों के अनुसार, यह पूरी साजिश तिगवाल गांव के रहने वाले पुपेन एक्का ने रची थी। उसने प्रियंका को रांची घुमाने का सुनहरा सपना दिखाया। भोली-भाली प्रियंका उसके बहकावे में आ गई, लेकिन उसे क्या पता था कि वह अपनी आजादी की आखिरी सांसें अपने गांव में ले रही है। कुछ दिनों तक फोन पर बातचीत हुई, फिर अचानक संपर्क टूट गया। पिता अनिल एक्का का आरोप है कि पुपेन ने उनकी बेटी को राजस्थान में किसी गिरोह के हाथों मोटी रकम में बेच दिया है। ताज्जुब की बात यह है कि आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहा है।
सिस्टम की बेरुखी: “बार-बार यहां क्यों आते हो?”
हृदयविदारक बात यह है कि प्रियंका के पिता अनिल एक्का अब तक तीन बार थाने में लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर उन्हें सिर्फ फटकार मिली। पुलिस के संवेदनहीन रवैये का आलम यह है कि एक बीमार पिता को न्याय देने के बजाय उसे थाने से भगा दिया जाता है। उधर, प्रियंका की मां शालोमि एक्का अपनी बेटी के जूतों को सीने से लगाकर रोती रहती है, क्योंकि बेटी ने फोन पर आखिरी बार यही कहा था— “मां, मेरे जूते संभाल कर रखना।”
मां की आखिरी याद: “मेरे जूते संभाल कर रखना”; मासूम सपनों का कत्ल
प्रियंका की मां शालोमि एक्का की आंखों के आंसू सूख चुके हैं। उन्होंने बताया कि आखिरी बार जब प्रियंका का किसी अनजान नंबर से फोन आया था, तो उसने रोते हुए बस इतना कहा था, “मां, मेरे जूते अच्छे से संभाल कर रखना।” शायद उसे उम्मीद थी कि वह जल्द लौटेगी, लेकिन राजस्थान के दलदल ने उसे कैद कर लिया है। चैनपुर और आसपास के इलाकों में यह कोई पहला मामला नहीं है; दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में यहां की आदिवासी युवतियों को ‘भेड़-बकरियों’ की तरह बेचा जा रहा है।
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