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India News: भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं आम परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा निगल जाती हैं। बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करना आम बात है। लेकिन दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहां शिक्षा पर एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। यहां तक कि किताबें, यूनिफॉर्म और खाना भी सरकार उपलब्ध कराती है।
फ्रांस और जर्मनी में पढ़ाई मुफ्त
फ्रांस में शिक्षा पूरी तरह फ्री है और इसका लाभ विदेशी बच्चों को भी मिलता है। यहां केवल यूनिफॉर्म, किताबों और कैंटीन चार्जेस का खर्च उठाना पड़ता है। वहीं जर्मनी में प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक शिक्षा मुफ्त है। यहां सभी बच्चों के लिए शिक्षा का समान अधिकार है और ट्यूशन फीस पूरी तरह शून्य है। हालांकि स्टेशनरी और किताबें खुद खरीदनी पड़ती हैं।
फिनलैंड और नॉर्वे का मॉडल
फिनलैंड शिक्षा व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक सब कुछ मुफ्त है। सरकार बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म और यहां तक कि खाना भी देती है। नॉर्वे में भी हाई स्कूल तक की पढ़ाई पूरी तरह फ्री है। प्रवासी बच्चों को भी यह सुविधा मिलती है। हालांकि सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर मामूली शुल्क लिया जाता है।
स्वीडन, क्यूबा और डेनमार्क में भी शिक्षा पर नहीं खर्च
स्वीडन में शिक्षा को खास महत्व दिया जाता है। सरकार यहां न केवल किताबें बल्कि भोजन भी उपलब्ध कराती है। केवल ट्रांसपोर्ट का खर्च परिवारों को उठाना पड़ता है। क्यूबा में प्राथमिक शिक्षा से लेकर यूनिवर्सिटी तक सब कुछ सरकार के जिम्मे है। यह सुविधा मुख्य रूप से नागरिकों को मिलती है, लेकिन कुछ मामलों में विदेशी छात्रों को भी इसका लाभ मिलता है। डेनमार्क तो शिक्षा के मामले में सबसे आगे है। यहां लगभग हर स्तर की पढ़ाई पूरी तरह फ्री है।
भारत के लिए सबक
इन देशों का उदाहरण बताता है कि शिक्षा को जब सरकार अपनी जिम्मेदारी मान लेती है, तो आम परिवारों पर आर्थिक बोझ काफी हद तक घट सकता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह मॉडल सीखने लायक है, ताकि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार बन सके और पैसों की वजह से कोई पीछे न रह जाए।

