अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
World News: फ्रांस ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का ऐतिहासिक कदम उठाया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस फैसले की घोषणा की, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलाव ला सकता है, लेकिन देश के अंदर भी इसके प्रभाव दिखाई देने लगे हैं।
फ्रांस में इस फैसले के बाद कई जगहों पर उत्सव मनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस के सिटी हॉल समेत कुल 86 स्थानों पर फिलिस्तीनी झंडे फहराए गए। हालांकि सरकार ने सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगा रखी थी, फिर भी लोग इस ऐतिहासिक क्षण को सेलिब्रेट करने के लिए सड़कों पर उतर आए।
फ्रांस यूरोप का सबसे बड़ा यहूदी आबादी वाला देश है। यहां लगभग 5 लाख यहूदी रहते हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। फिलिस्तीन को मान्यता मिलने के बाद उनके और फिलिस्तीनी समर्थकों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई लोग इस फैसले और सार्वजनिक आयोजनों से नाराज भी हैं। उनका कहना है कि किसी दूसरे देश के झंडे फहराने के लिए स्थानीय स्तर पर आयोजन क्यों हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही। इजरायल ने फ्रांस के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह हमास जैसे आतंकी संगठनों को प्रोत्साहित कर सकता है, जिन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया था। अमेरिका ने भी इस फैसले से सहमति व्यक्त नहीं की, हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से कोई सख्त टिप्पणी नहीं दी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्रांस का यह कदम मध्यपूर्व की राजनीति और यूरोप में यहूदी और फिलिस्तीनी समुदायों के बीच संतुलन को प्रभावित कर सकता है। वहीं, फ्रांस सरकार का कहना है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार के दृष्टिकोण से लिया गया है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद फ्रांस में फिलिस्तीन समर्थक और विरोधी समूहों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। पेरिस और अन्य शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी तरह की हिंसा या अशांति को रोका जा सके।

