Ranchi : समाज में जब स्वच्छता और जागरूकता की बात होती है तो अक्सर लोग सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हैं। लेकिन पिठोरिया के रहने वाले मधु साहू इस सोच को बदल रहे हैं। वे बिना किसी सरकारी सहयोग या प्रचार-प्रसार के, प्रतिदिन पिठोरिया तालाब और स्थानीय साप्ताहिक बाजार की सफाई कर समाज के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसा वे पिछले 6 वर्षो से लगातार प्रतिदिन करते चले आ रहे है। आप किसी भी दिन किसी भी समय पिठोरिया तालाब आएं, यह तालाब आपको हमेशा स्वच्छ ही मिलेगा। इसका जल दूर से ही अपको आकर्षित करेगा और आप यहां आकर सुकून पाएंगें। तालाब की सफाई बाबत पूछे जाने पर मधु कहते हैं-“स्वच्छ तालाब ही गांव की खूबसूरती और जीवनरेखा है। इसे गंदा देख घर-आंगन गंदा है, ऐसा महसुस होता है। इसे स्वच्छ किए बिना मैं नहीं रह सकता।”
मधु साहू का दिन सूरज निकलने से पहले ही शुरू हो जाता है। वे हाथों में झाड़ू, टोकरी और सफाई का सामान लिए अंधेरे में ही ( लगभग 4:15 बजे पूर्वाह्न) पिठोरिया तालाब की ओर निकल पड़ते हैं। तालाब के किनारे फैली प्लास्टिक की बोतलें, पत्ते और कचरे को वे अपने हाथों से साफ करते हैं। पानी में तैरते कचरे को निकालना उनके लिए आसान नहीं होता, लेकिन उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ। क्या बारिश, क्या ठंड, हर मौसम में उनका हौशला इतनी ऊंचाई पर होता है कि स्थानीय लोग उनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाते।
उनकी मेहनत महापर्व छठ के दौरान तो और भी बढ़ जाती है। इस पर्व में लोगों को तालाब या उसके आस-पास सफाई करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती क्योंकि मधु साहू पहले ही आस-पास के माहौल को स्वच्छ कर चुके होते हैं। स्थानीय बताते हैं कि यह तालाब पिठोरिया चौक के सौंदर्य को बढ़ाता है। लेकिन इसमें काफी गंदगी थी, अकेले मधु साहू हैं जो बिना सरकारी मदद या स्थानीय मदद के केवल अपने बाहुबल पर न केवल तालाब और इसके आस-पास की गंदगी को दूर किए बल्कि इसे अब तक स्वच्छ बनाए हुए हैं।
पिठोरिया में सप्ताह में दो दिन लगने वाले साप्ताहिक बाजार के बाद जो कचरा और गंदगी बच जाती है, उसे भी मधु साहू स्वयं साफ करते हैं। बाजार खत्म होने के बाद जब हर कोई अपने घर लौट जाता है, तब वे अपने झाड़ू और टोकरी के साथ वहां पहुंचते हैं और देर रात तक सफाई का काम करते रहते हैं। उनका कहना है कि अगर बाजार गंदा रहेगा तो लोगों की सेहत पर असर पड़ेगा, इसलिए साफ-सफाई बेहद जरूरी है। मधु साहू कहते हैं, “स्वच्छता सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। अगर हम खुद अपने आस-पास सफाई नहीं करेंगे, तो किससे उम्मीद करेंगे?” उनकी यह बात लोगों के दिलों को छू जाती है।
मधु के कार्य से प्रभावित होकर लोग हो रहे जागरूक
मधु के लिए पद्मश्री की मांग
मधु साहू जिस तरह प्रतिदिन बिना किसी लोभ-लालच के इस तालाब और स्थानीय साप्ताहिक बाजार की साफ-सफाई करते हैं, वह नि:संदेह प्रशंसनीय है। उनके इस स्वच्छता कार्य की चहुंओर प्रशंसा हो रही है और उनके लिए सरकार से पद्मश्री की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आप इस तरह प्रतिदिन किसी एक स्थल की नियमित रूप से बिना किसी स्वार्थ या लालच के सफाई नहीं कर सकते। मधु साहू भीड़ से हटकर काम करने वाले विशेष व्यक्तित्व हैं, इसलिए उनके कार्य की सम्मान और सराहना की जानी चाहिए। राज्य सरकार को उनके नाम पद्मश्री देने के लिए केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजनी चाहिए ताकि मधु के कार्य से अन्य लोगों को प्रेरणा मिल सके।
मधु साहू की यह पहल न सिर्फ स्वच्छता का संदेश देती है बल्कि यह भी साबित करती है कि सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़ी योजनाओं की जरूरत नहीं होती। बस एक व्यक्ति की ईमानदारी और नि:स्वार्थ भाव से किया गया प्रयास ही समाज को दिशा दे सकता है। उनके लिए पद्मश्री की मांग एक जायज मांग है, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और एक बेहतर उदाहरण पेश करना चाहिए।



