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Ranchi : देश की आज़ादी को 78 वर्ष और झारखंड गठन को 24 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन कांके प्रखंड के रेंडो–पतरातू (रिंग रोड मंद्रा मुंडा चौक से बढ़ागाई लेम बस्ती तक) की सड़क आज भी अधूरी है। क्षेत्र की हजारों की आबादी आज भी इस बुनियादी सुविधा से वंचित है। यह सड़क केवल कंक्रीट का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इसके बन जाने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की राह आसान हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेताओं द्वारा सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई भी जनता की सुध लेने नहीं आता। सबसे खराब हालात बरसात के दिनों में होती है। कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों से भरी यह कच्ची सड़क न केवल आम आवाजाही में बाधा डालती है बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं का कारण भी बन रही है। स्कूली बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचाना और बीमारों को अस्पताल ले जाना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने कई बार प्रशासन को इस मुद्दे से अवगत कराया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि न तो विधायक और न ही सांसद इस सड़क निर्माण को लेकर गंभीर दिखे हैं। यही वजह है कि अब लोगों में निराशा के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।

कांके विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष आसिफ़ इक़बाल का कहना है कि आज़ादी के 78 साल बाद भी अगर क्षेत्र में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल सकी, तो यह सरकार की नाकामी का प्रतीक है। नवंबर में हमसब झारखंड का 25वां स्थापना दिवस मनायेंगे। राज्य गठन के 24 वर्ष गुजरने के बावजूद इस सड़क का पक्कीकरण नहीं होना भ्रष्टाचार के कई परत खोलता है। उन्होंने कहा कि सड़क बनने से ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन लगातार अनदेखी ने यह समस्या और गंभीर बना दी है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब बड़े-बड़े विकास के दावे किए जाते हैं, तो फिर बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं? क्या विकास केवल कागजों और भाषणों में ही सीमित है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सड़क बन जाए तो आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और प्रशासन इस समस्या को प्राथमिकता से लें और जल्द से जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करें। अब लोगों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस काम चाहिए।

