India News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक हाई-प्रोफाइल मामले में सहारा ग्रुप पर शिकंजा कसते हुए दो बड़ी गिरफ्तारियां की हैं। शनिवार को ED की कोलकाता यूनिट ने सहारा ग्रुप के पूर्व निदेशक अनिल अब्राहम और प्रॉपर्टी ब्रोकर जीतेन्द्र प्रसाद को हिरासत में लिया। दोनों पर करोड़ों रुपये की अवैध प्रॉपर्टी डील और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का आरोप है।
ED के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सहारा ग्रुप के खिलाफ जारी वृहद जांच अभियान का हिस्सा है। जांच एजेंसी को यह संदेह है कि इन दोनों की मिलीभगत से कई जमीनों और संपत्तियों की गैरकानूनी बिक्री की गई और उससे मिली रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए सफेद किया गया।
ED सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कोलकाता में की गई छापेमारी के दौरान यह कार्रवाई की गई। इस रेड में अधिकारियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर यह गिरफ्तारी की गई। एजेंसी को इनसे पूछताछ के दौरान कई अन्य संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलने की भी संभावना है।
बता दें कि सहारा ग्रुप लंबे समय से प्रवर्तन एजेंसियों के रडार पर रहा है। सेबी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद समूह आम जनता की भारी-भरकम रकम लौटाने में विफल रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सहारा ग्रुप पर जनता की लगभग 1.74 हजार करोड़ रुपये की देनदारी है, जिसे वापस पाने के लिए कई स्तरों पर कानूनी कार्रवाई चल रही है।
अनिल अब्राहम, जो सहारा ग्रुप में निदेशक के पद पर थे, पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई संपत्तियों की अघोषित बिक्री कराई और उस पैसे को शेल कंपनियों और फर्जी खातों के माध्यम से खपाया। वहीं, ब्रोकर जीतेंद्र प्रसाद इस पूरी कड़ी में प्रॉपर्टी डीलिंग और पेमेंट चैनल को संचालित करने में मुख्य भूमिका निभाता था।
सूत्रों की मानें तो इस मामले में अभी कई अन्य चेहरे भी एजेंसी के रडार पर हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। ED ने इन गिरफ्तारियों के बाद न्यायालय से दोनों आरोपियों की कस्टडी रिमांड मांगी है ताकि उनसे आगे की पूछताछ की जा सके और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
वित्तीय अपराधों पर सख्त नजर रखने वाली ED की यह कार्रवाई संकेत देती है कि सरकार अब मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराधों पर और सख्त रुख अपनाने जा रही है। सहारा ग्रुप जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों की जांच से आम जनता में भी यह संदेश जा रहा है कि भरोसे के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस बीच, आम निवेशक वर्ग में भी इस कार्रवाई को लेकर उम्मीद की किरण नजर आ रही है। लोगों का मानना है कि अगर जांच एजेंसियां इस तरह सख्ती से कार्रवाई करेंगी तो शायद उन्हें अपने पैसे वापस मिलने की कोई राह बन सकेगी।



