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Patna News: पटना में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से जिले के पांच प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। भारी बारिश और नेपाल से छोड़े गए पानी ने बिहार में बाढ़ का संकट गहरा दिया है, जिसका सीधा असर पटना जिले के मनेर, दानापुर, पटना सदर, बाढ़ और मोकामा प्रखंडों पर पड़ा है। इस भयावह स्थिति के कारण इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों ने अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 50,000 से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इस कार्य के लिए 35 नावें तैनात की गई हैं, जो प्रभावित इलाकों से लोगों को बाहर निकालने में मदद कर रही हैं। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीबीडी), अंचलाधिकारी (सीओ) और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद मोर्चा संभाला है। उन्होंने दीघा पाटीपुल, मीनार घाट, कुर्जी बिंदटोली घाट और अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत व्यवस्था की समीक्षा की और पीड़ितों से सीधे संवाद भी किया।
गंगा नदी का जलस्तर हर घंटे 1 सेंटीमीटर से अधिक की रफ्तार से बढ़ रहा है। बीते 24 घंटे में गांधीघाट पर जलस्तर 49.57 मीटर से बढ़कर 49.87 मीटर, दीघाघाट पर 50.81 से 51.10 मीटर, मनेर में 52.74 से 52.99 मीटर, और हाथीदह में 42.48 से 42.74 मीटर तक पहुंच गया है। वहीं, सोन नदी में भी कोईलवर पर जलस्तर 53.01 से 53.51 मीटर तक बढ़ गया है, जिससे गंगा और सोन दोनों नदियों के किनारे बसे इलाकों में स्थिति और भी खराब हो गई है।
बाढ़ के कारण निचले इलाकों की सड़कें पूरी तरह से पानी में डूब गई हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। अथमलगोला के रामनगर दियारा पंचायत के वार्ड संख्या 9, 10, 11 और 12 सबसे अधिक प्रभावित हैं। यहां की मुख्य सड़क पानी में समा गई है, जिससे ग्रामीणों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
राहत और बचाव कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला प्रशासन ने 11 कोषांगों का गठन किया है। इन टीमों में एसडीएम, डीएसपी, सीओ और थाना प्रभारी जैसे अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए तीन शरणस्थल भी स्थापित किए हैं: नकटा दियारा (पाटीपुल), मीनार घाट और मरीन ड्राइव पर बिंदटोली के लोगों के लिए टेंट लगाए गए हैं। इन शरणस्थलों में सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधाएं और मवेशियों के लिए चारे की भी व्यवस्था की गई है। बाढ़ और मोकामा में भी सामुदायिक रसोईयां लगातार काम कर रही हैं।
दानापुर के दियारा क्षेत्र में भी स्थिति भयावह होती जा रही है। जलस्तर बढ़ने के कारण लोग अपने मवेशियों और घरेलू सामान के साथ ऊँचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। कई लोग बलदेव इंटर स्कूल में शरण लिए हुए हैं, जबकि कुछ अपने रिश्तेदारों के यहां आश्रय ले रहे हैं।
जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या सूचना के लिए जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष (0612-2210118) पर संपर्क करें। यह हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे चालू है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक समय पर मदद पहुंचाई जा सके।

