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Astrology News: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन श्रीहरि विष्णु चार माह की योग निद्रा से जाग्रत होते हैं और तुलसी माता के साथ शालिग्राम विवाह का उत्सव मनाया जाता है। आचार्य मनोज पांडेय ने बताया कि इस बार देवउठनी एकादशी पर ध्रुव योग, रवि योग और त्रिपुष्कर योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इसका पुण्यफल और बढ़ जाएगा।
एकादशी तिथि और महत्व
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 31 अक्टूबर की रात 4.02 बजे से शुरू होकर 1 नवंबर की रात 2.57 बजे तक रहेगी। इस तिथि पर भगवान विष्णु और माता तुलसी की आराधना से कन्यादान के समान पुण्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विधिवत पूजन से मिलेगा सुख-सौभाग्य
आचार्य ने बताया कि तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह के दिन लकड़ी की चौकी पर लाल आसन बिछाकर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम की विदिवत स्थापना करनी चाहिए। गन्ने से मंडप बनाकर षोडशोपचार विधि से पूजा करने, तुलसी को लाल चुनरी से सजाने और सात परिक्रमा कर आरती करने का विशेष महत्व है। ऐसा करने से गृहस्थ जीवन में सौहार्द और सुख की वृद्धि होती है।
18 नवंबर से शादियों का दौर शुरू
देवउठनी एकादशी के साथ ही विवाह-मुहूर्तों की शुरुआत हो जाएगी। नवंबर में 18, 19, 21, 22, 24, 25, 29 और 30 को शुभ लग्न हैं। दिसंबर में 1, 4, 5 और 6 को विवाह के शुभ मुहूर्त बनेंगे। वहीं, 2026 के फरवरी और मार्च माह में भी कई शुभ तिथियां रहेंगी।

