Jharkhand News: देवघर के पुराना सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में पिछले एक साल से एलाइजा जांच मशीन खराब पड़ी हुई है, जिससे मरीजों को दिए जाने वाले खून की जांच मैनुअल तरीके और रैपिड किट से की जा रही है। यह स्थिति न केवल चिकित्सा मानकों के खिलाफ है, बल्कि गंभीर संक्रमणों के फैलाव का खतरा भी बढ़ा रही है।
जानकारी के अनुसार, एलाइजा मशीन खून की जांच का सबसे विश्वसनीय तरीका मानी जाती है। इसी के माध्यम से खून में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी जैसी बीमारियों की सटीक जांच होती है। लेकिन ब्लड बैंक में वर्षों पहले लगाई गई एलाइजा मशीन अब खराब हो चुकी है। मशीन की केलिब्रेशन गड़बड़ होने के कारण जांच में सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है, जिससे इसका उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
ब्लड बैंक प्रभारी और सिविल सर्जन ने कई बार विभाग को नई मशीन की मांग को लेकर प्रस्ताव भेजा, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई है। जिला प्रशासन ने भी इस मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह भी अधूरी रह गई।
फिलहाल, ब्लड बैंक में प्रतिदिन 35 से 40 यूनिट रक्त का संग्रहण और वितरण होता है। इसमें थैलेसीमिया से पीड़ित करीब तीन से चार मरीज नियमित रूप से खून प्राप्त करते हैं। मैनुअल जांच और रैपिड किट के भरोसे मरीजों को खून दिया जा रहा है, जो कि जोखिम भरा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रैपिड किट से जांच पूर्ण रूप से भरोसेमंद नहीं होती और कई बार संक्रमण छिपा रह सकता है। ऐसे में बिना एलाइजा जांच के खून देना एक गंभीर लापरवाही है।
देवघर जैसे धार्मिक और चिकित्सा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जिले में ब्लड बैंक की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में त्वरित और गंभीर कदम उठाने की जरूरत है, ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ न हो।



