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New Delhi: नई दिल्ली अब न केवल प्रदूषण बल्कि कैंसर के मामलों में भी देश के अन्य महानगरों को पीछे छोड़ रही है। 2015 से 2019 के बीच किए गए एक व्यापक अध्ययन ने दिल्ली की सेहत को लेकर चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रति एक लाख पुरुषों पर लगभग 147 कैंसर मरीज दर्ज किए गए हैं, जो भारत के किसी भी अन्य मेट्रो शहर की तुलना में सबसे अधिक है।
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अध्ययन के लिए देश भर की 43 कैंसर रजिस्ट्रियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें सामने आया कि भारत में हर दस में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने का खतरा है। दिल्ली सीके बिड़ला हॉस्पिटल के विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल बेहतर डेटा रिकॉर्डिंग की वजह से नहीं है, बल्कि वास्तव में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
विशेषज्ञों ने कैंसर के इस बढ़ते ग्राफ के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं:
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प्रदूषण: दिल्ली की हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे जहरीले कण फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण बन रहे हैं।
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तंबाकू का सेवन: धूम्रपान और तंबाकू के कारण मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले सबसे ज्यादा हैं।
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खराब जीवनशैली: मोटापा, शारीरिक सक्रियता की कमी, और जंक फूड का अत्यधिक सेवन युवाओं में कैंसर के खतरे को बढ़ा रहा है।
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पर्यावरणीय कारक: भारी धातुओं का संपर्क और प्रदूषित पानी भी एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।
चिंता की बात यह है कि अब कैंसर केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। युवाओं में अक्सर बीमारी का पता देर से चलता है, जिससे इलाज और भी जटिल हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते स्क्रीनिंग और जीवनशैली में बदलाव न किया गया, तो आने वाले सालों में यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

