India News: वर्ष 2025 का अंत जलवायु संकट की घातक तस्वीर बनकर उभर रहा है। इस समय दो विशाल समुद्री तूफान — “साइक्लोन मोंथा” और “हरिकेन मेलिसा” — दो अलग महासागरों में एकसाथ सक्रिय हैं और दुनिया के दो छोरों पर विनाश मचा रहे हैं। एक ओर मोंथा भारत के दक्षिण-पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ मेलिसा कैरिबियाई क्षेत्र में तबाही का पर्याय बन चुका है।

साइक्लोन मोंथा: “सुगंधित फूल” से उठी तबाही

थाईलैंड द्वारा सुझाए गए “मोंथा” नाम का अर्थ होता है “सुगंधित फूल,” लेकिन इस बार इसकी रफ्तार ने तबाही का रूप ले लिया। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में जन्मे इस तूफान ने गर्म समुद्री पानी से ऊर्जा लेकर खतरनाक रूप धारण कर लिया। मौसम विभाग के अनुसार, मोंथा आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट से टकरा सकता है। हालांकि इसके पहले ही हवाओं की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई है। एनडीआरएफ की टीमें तटीय इलाकों में तैनात हैं और हजारों लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मोंथा बड़ा नुकसान करता है, तो उसका नाम विश्व मौसम संगठन की सूची से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा।

हरिकेन मेलिसा: अटलांटिक का रौद्र रूप

दूसरी ओर, अटलांटिक महासागर से उठे “हरिकेन मेलिसा” ने इतिहास रच दिया है। पश्चिम अफ्रीका से निकली एक ट्रॉपिकल वेव ने इसे जन्म दिया, और अब यह कैटेगरी-5 दर्जे तक पहुंच चुका है। अमेरिकी नेशनल हरिकेन सेंटर (NHC) ने इसे 282 किमी/घंटा की रफ्तार वाला “सुपर हरिकेन” बताया है। जमैका, हैती और डोमिनिकन रिपब्लिक में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों परिवार बाढ़ और तूफानी लहरों के कारण बेघर हुए हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह 1851 के बाद से जमैका को प्रभावित करने वाला सबसे शक्तिशाली हरिकेन हो सकता है।

फर्क क्या है दोनों में?

नाम भले अलग हों, लेकिन दोनों तूफान प्रकृति के एक ही रूप — “ट्रॉपिकल साइक्लोन” — के उदाहरण हैं। फर्क सिर्फ उनके स्थान और नामकरण में है। भारतीय उपमहाद्वीप और बंगाल की खाड़ी में ऐसे तूफानों को “साइक्लोन” कहा जाता है, जबकि अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत क्षेत्रों में इन्हें “हरिकेन” के नाम से जाना जाता है। नाम विश्व मौसम संगठन (WMO) की सूची से लिए जाते हैं — एशिया में देशों के सुझाव पर तो अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र में छह साल के तय चक्र के आधार पर।

बढ़ते महासागरीय तापमान की चेतावनी

मोंथा और मेलिसा इस बात का संकेत हैं कि महासागर का बढ़ता तापमान अब जलवायु संकट को नए चरम पर पहुंचा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पृथ्वी का औसत तापमान इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में ऐसे तूफान न केवल शक्तिशाली होंगे, बल्कि बार-बार आएंगे।

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