Ranchi : झारखंड में पहचान की राजनीति से उपजे आदिवासी और कुड़मी समुदायों के बीच बढ़ते विभाजन पर माकपा ने गहरी चिंता जताई है। रविवार को हुई राज्य कमिटी की बैठक में पार्टी ने स्पष्ट कहा कि यह विभाजन राज्य की सामाजिक एकता और प्रगति के लिए बेहद हानिकारक है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि किसानों, युवाओं और मजदूर तबकों की एकजुटता बनाए रखने के लिए माकपा राज्यव्यापी अभियान चलाएगी। पार्टी ने इस बात का स्वागत किया कि दोनों समुदायों के भीतर बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो विभाजन की राजनीति का विरोध कर रहे हैं। माकपा ने इन प्रगतिशील लोगों के साथ संवाद बढ़ाकर सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
बैठक में राज्य के सरकारी ब्लड बैंक की बदहाल स्थिति और जिला अस्पतालों को पीपीपी मोड में दिए जाने का कड़ा विरोध किया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि इससे गरीब तबकों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होगी। साथ ही, संताल परगना और कोल्हान क्षेत्र में खनन से होने वाले प्रदूषण, सड़क दुर्घटनाओं और कृषि भूमि के नुकसान पर चिंता व्यक्त की गई।
माकपा ने अंचल कार्यालयों में लंबित दाखिल-खारिज, गैर-मजरुआ भूमि की रसीद और भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया। बैठक में यह भी तय किया गया कि 7 नवंबर (समाजवादी क्रांति दिवस) से 15 नवंबर (झारखंड स्थापना दिवस) तक “केरल मॉडल” के पक्ष में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता सुरजीत सिन्हा ने की।



