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Saraikela News: सीएम हेमंत सोरेन ने खरसावां गोलीकांड के शहीदों को सम्मान देने और उनके परिवारों के अधिकार सुनिश्चित करने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब शहीदों को गुमनामी में नहीं रहने दिया जाएगा और उनके परिजनों को सम्मान के साथ उनका हक मिलेगा। इसके लिए राज्य सरकार शीघ्र ही एक कमेटी का गठन करेगी और रिटायर जजों को शामिल करते हुए न्यायिक जांच आयोग भी बनाया जाएगा।
सीएम गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को खरसावां शहीद स्थल पहुंचे और सीधे शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने मीडिया से बातचीत और सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक जनवरी पूरी दुनिया के लिए नया साल है, लेकिन झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, किसान और मजदूरों के लिए यह शहीद दिवस है। जब लोग नए साल का जश्न मना रहे होते हैं, तब झारखंड के लोग अपने शहीदों को याद करते हैं। यही झारखंड की असली पहचान और गौरवशाली इतिहास है।
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सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा हुआ है। कोल्हान, संताल, छोटानागपुर और पलामू—हर क्षेत्र में शहीदों की गाथाएं मौजूद हैं। यहां के वीर सपूतों ने अपनी जान की कुर्बानी दी ताकि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हो सके। अंग्रेजी शासन हो या बाद का दौर, झारखंड के लोगों ने हमेशा अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया। खरसावां गोलीकांड इसी जज्बे और संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल है।
सीएम ने बताया कि सरकार ने शहीदों की पहचान और उनके परिजनों को सम्मान देने के लिए मसौदा तैयार कर लिया है। इसे पूरी तरह समझने और संतुष्ट होने के बाद लागू किया जाएगा। न्यायिक जांच आयोग के गठन से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी शहीद या उनके परिवार के साथ अन्याय न हो।
सभा में सीएम के साथ मंत्री दीपक बिरुआ, सिंहभूम की सांसद जोबा मांझी, खरसावां के विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ की विधायक सविता महतो सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। शहीद स्मारक समिति की ओर से सीएम का भव्य स्वागत किया गया।
विधायक दशरथ गागराई ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि खरसावां गोलीकांड आज़ाद भारत के सबसे बड़े गोलीकांडों में से एक है। यह घटना स्वतंत्रता के महज साढ़े चार महीने बाद हुई थी, जब पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा था। आदिवासियों की भीड़ पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें कई निर्दोष लोग शहीद हुए। तब से आदिवासी समाज 1 जनवरी को शोक दिवस के रूप में मनाता है। गागराई ने मांग की कि शहीदों की पहचान के काम को दोबारा शुरू किया जाए और झारखंड के बाहर से आए शहीदों को भी सम्मान मिले।
इतिहास के अनुसार, एक जनवरी 1948 को खरसावां को ओडिशा में शामिल करने के फैसले के विरोध में आदिवासियों ने आंदोलन शुरू किया था। इसी आंदोलन के दौरान हाट बाजार में भीड़ पर गोली चलाई गई। यह घटना जलियावाला बाग हत्याकांड के बाद देश की दूसरी बड़ी गोलीकांड मानी जाती है। तभी से हर साल 1 जनवरी को खरसावां में शहीद दिवस मनाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
सीएम हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर यह भी स्पष्ट किया कि सरकार शहीदों को नमन करने के साथ-साथ उनके आश्रितों के सम्मान और अधिकारों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अगले शहीद दिवस से पहले शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मान देने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।

