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Beijing, (China): कभी दुनिया की सबसे घनी आबादी वाला देश रहा चीन आज एक ऐसे ‘सन्नाटे’ की ओर बढ़ रहा है, जिसने बीजिंग की रातों की नींद उड़ा दी है। ड्रैगन के लिए सबसे डरावनी खबर यह है कि देश में जन्म दर अपने इतिहास के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो पिछले साल चीन में महज 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 17 प्रतिशत की भारी गिरावट है। 1949 के बाद से चीन ने बच्चों की इतनी कम किलकारियां पहले कभी नहीं सुनी थीं।
सख्त नीतियों का कड़वा फल
दशकों तक ‘एक बच्चा नीति’ (One-Child Policy) को सख्ती से लागू करने वाले चीन के सामने अब एक ऐसा सामाजिक ढांचा खड़ा है, जहां युवाओं से ज्यादा बुजुर्गों की तादाद है। आज स्थिति यह है कि मौतों का आंकड़ा 1.13 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले पांच दशकों में सबसे अधिक है। चीन की कुल आबादी अब घटकर 1.4049 अरब रह गई है।
शादी और बच्चों से कतरा रहा है युवा
चीन की सरकार भले ही चाइल्डकेयर सब्सिडी के रूप में 10,800 युआन बांट रही हो या शादी की कागजी कार्रवाई आसान कर रही हो, लेकिन चीन का युवा इन लालचों में नहीं आ रहा। आसमान छूती घरों की कीमतें, नौकरी खोने का डर, दफ्तरों में लंबे कामकाजी घंटे और बच्चों की पढ़ाई का भारी खर्च—ये वो कड़वी सच्चाइयां हैं जिन्होंने युवाओं को शादी और बच्चों से दूर कर दिया है। कई युवा अब ‘अकेले रहने’ को ही अपनी नियति मान चुके हैं।
भविष्य पर मंडराता खतरा
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही हाल रहा, तो चीन के पास काम करने वाले हाथ (Labour Force) कम हो जाएंगे और पेंशन का बोझ उठाने वाले कंधों की कमी हो जाएगी। बीजिंग ने तलाक के नियम कड़े कर दिए हैं और प्रजनन सेवाओं में बीमा कवर बढ़ा दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सामाजिक और आर्थिक दबाव कम नहीं होगा, तब तक ये नीतियां सिर्फ कागजों पर ही अच्छी लगेंगी।
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