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Health News: भारतीय रसोई में मौजूद कई मसाले सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत भी बढ़ाते हैं। इन्हीं में से एक है अदरक, जिसे हम रोज चाय या सब्जी में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके फायदे इससे कहीं ज्यादा हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो गले, पाचन और सांस से जुड़ी कई परेशानियों में धीरे-धीरे राहत देते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ठाणे की एक चीफ डाइटिशियन ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति रोज 60 दिनों तक अदरक का छोटा सा टुकड़ा चबाता है, तो इसका असर शरीर पर साफ दिखने लगता है। सबसे पहले गले की जलन और भारीपन कम होता है। इसके साथ ही सांस की नलियां धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगती हैं, जिससे सांस लेना थोड़ा आसान महसूस होता है।
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डाइटिशियन के अनुसार अदरक कोई जादुई दवा नहीं है जो फेफड़ों को तुरंत खोल दे, लेकिन इसका असर धीरे और स्थायी होता है। यह गले की जकड़न को कम करता है, बलगम को ढीला करता है और उसे बाहर निकालने में मदद करता है। खासतौर पर ठंड या प्रदूषण की वजह से होने वाली हल्की सांस की परेशानी में अदरक काफी सहायक हो सकता है।
इसके अलावा अदरक पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद है। इसे चबाने से डाइजेशन बेहतर होता है, गैस और भारीपन की समस्या कम होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी सुधरता है। यही वजह है कि इसे आयुर्वेद में भी एक ताकतवर प्राकृतिक उपाय माना गया है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि अस्थमा या सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों में अदरक केवल सपोर्ट का काम कर सकता है, इलाज का विकल्प नहीं बन सकता। ऐसे मामलों में डॉक्टर की दवा और सलाह सबसे जरूरी होती है।
जहां तक मात्रा की बात है, ज्यादातर लोगों के लिए रोज थोड़ा अदरक खाना सुरक्षित माना जाता है। डाइटिशियन के अनुसार अंगूठे के बराबर एक छोटा टुकड़ा या 2–3 पतले स्लाइस काफी होते हैं। ज्यादा मात्रा लेने से मुंह में जलन, एसिडिटी या गैस की समस्या हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि अदरक खून को थोड़ा पतला कर सकता है। इसलिए जो लोग ब्लड थिनर दवाएं लेते हैं, या जिन्हें एसिड रिफ्लक्स और गैस्ट्राइटिस की समस्या है, उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर कच्चा अदरक चबाने से सीने में जलन हो, तो इसे गुनगुने पानी में डालकर पीना बेहतर विकल्प हो सकता है।

