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Bokaro News: झारखंड की सियासत इन दिनों गरमाई हुई है। सूर्या हांसदा की कथित हत्या और नगड़ी की जमीन विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी राज्य सरकार पर हमलावर है। इसी कड़ी में शुक्रवार को बोकारो जिला भाजपा ने चास प्रखंड कार्यालय से पैदल मार्च निकालते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए दो बड़ी मांगें रखीं – पहली, सूर्या हांसदा की हत्या की सीबीआई जांच और दूसरी, नगड़ी रैयतों की जमीन को वापस दिलाने के लिए राज्य सरकार को निर्देश।
इस मौके पर जिला अध्यक्ष जयदेव राय, पूर्व विधायक बिरंचि नारायण समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सरकार पर गंभीर आरोप
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व विधायक बिरंचि नारायण ने हेमंत सरकार को संवेदनहीन, भ्रष्ट और निकम्मी बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। अपराधी, माफिया, दलाल और बिचौलियों ने पूरे सरकारी तंत्र पर कब्जा जमा लिया है। जो भी इनका विरोध करता है, उसे हत्या, फर्जी मुकदमे, धमकी या फिरौती जैसे हमलों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी रजिस्टर के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हर महीने 5000 से ज्यादा गैर-जमानती अपराध जैसे हत्या, लूट, बलात्कार और डकैती हो रहे हैं।
सूर्या हांसदा की मौत पर उठाए सवाल
बिरंचि नारायण ने संथाल परगना के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सूर्या हांसदा की मौत को एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या करार दिया। उनके मुताबिक, सूर्या हांसदा गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा और भोजन की व्यवस्था करते थे और अवैध खनन व पत्थर तस्करी का विरोध करते थे। यही कारण था कि वे माफियाओं के निशाने पर थे।
उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा पर कोई वारंट नहीं था। 14 मुकदमों में वे बरी हो चुके थे और बाकी में जमानत मिल चुकी थी। बावजूद इसके पुलिस ने उन्हें घर से उठाकर टॉर्चर किया और फिर गोली मार दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने मीडिया को भी जानकारी नहीं दी, जिससे साफ है कि यह फर्जी एनकाउंटर था।
नगड़ी की जमीन को लेकर किसानों में आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने नगड़ी के रैयतों की जमीन का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उनका कहना था कि रिम्स-2 के नाम पर किसानों की जमीन छीनी जा रही है। यह वही जमीन है, जिसे 1955 में तत्कालीन बिहार सरकार ने अधिग्रहित करने की कोशिश की थी, लेकिन जन विरोध के बाद मुख्यमंत्री को नगड़ी आकर घोषणा करनी पड़ी थी कि जमीन नहीं ली जाएगी।
वर्ष 2012 में झारखंड सरकार ने फिर से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन एक बार फिर भारी विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा। तब से किसानों को मालगुजारी रसीद नहीं दी जा रही है, जिससे वे असमंजस और असुरक्षा में जी रहे हैं।
भाजपा ने राज्यपाल से लगाई गुहार
भाजपा नेताओं ने कहा कि हेमंत सरकार आदिवासी हितों की दुहाई देती है, लेकिन हकीकत यह है कि “अबुआ राज” के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ा और पीटा जा रहा है। राज्य में आदिवासी जमीन छीनी जा रही है, हत्याएं बढ़ रही हैं और महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं।
भाजपा ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर आग्रह किया कि सूर्या हांसदा की हत्या की सीबीआई जांच कराई जाए और नगड़ी के किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाई जाए।
प्रदर्शन में कमलेश राय, डॉ. परिंदा सिंह, धीरज झा, मुकेश राय, रघुनाथ टुड्डू, आरती राणा, मनराज सिंह, जयप्रकाश तापड़िया समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए।

