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Home»#Trending»जीत को तरसती रही भाजपा, नहीं खुला खाता, बाजी मार गया कोई ओर
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जीत को तरसती रही भाजपा, नहीं खुला खाता, बाजी मार गया कोई ओर

त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे दिग्गज, प्रतिष्ठा लगी दांंव पर
एडिटरBy एडिटरOctober 27, 20246 Mins Read
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मुजफ्फर हुसैन

Ranchi : झारखंड में विधानसभा चुनाव जारी है। प्रत्येक पार्टी और प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने में लगे हैं। इसके लिए जितने भी हथकंडे वे अपना सकते हैं, अपना रहे हैं। उन्हें डर है तो बस चुनाव आयोग के निर्देशों का। यह डर चुनावी पार्टियों और प्रत्याशियों में होनी भी चाहिए क्योंकि चुनाव आयोग का उद्देश्य ही है निष्पक्ष चुनाव और एक मजबूत सरकार का गठन अर्थात लोकतंत्र की स्थापना। एक स्थायी सरकार में ही लोकतंत्र पोषित होता है और जन आकांक्षाओं का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है। लेकिन इस प्रदेश में एक ऐसी भी सीट है, जिस पर 1952 से किसी एक दल का दबदबा कभी रहा ही नहीं। कभी इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली तो कभी झापा को। कभी समता पार्टी को तो कभी जदयू को।

झारखंड गठन के बाद भी यही स्थिति बनी रही। पार्टियां बदलती रही और प्रत्याशी भी। जीता हुआ दल और प्रत्याशी यही चाहते रहे कि यह क्षेत्र उनका विजयी किला बना रहे लेकिन यह उनका दुर्भाग्य है कि ऐसा हो नहीं सका। भाजपा तो इस सीट पर जीत के लिए तरसती रही। जीत का खाता कभी खुला ही नहीं। या यों कहें भाजपा इस सीट पर ना कभी प्रबल दावेदारी कर सकी और ना ही मजबूत प्रत्याशी उतार सकी। भाजपा इस क्षेत्र में हमेशा कमजोर ही रही और अब भी है। यही कारण है कि इस सीट पर भाजपा के अतिरिक्त दूसरे दल एवं प्रत्याशी ने बाजी मारा है। यह सीट कोई और नहीं तमाड़ विधानसभा क्षेत्र है। यह झारखंड के रांची जिले में स्थित एक गांव है, जो बुंडू अनुमंडल में एक प्रखंड है। यह खूंटी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र में कुल 2 लाख 16 हजार 771 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 7 हजार 810 पुरुष और 1 लाख 8 हजार 959 महिला मतदाता हैं। इस चुनाव में कई दिग्गज फंसे हैं और उनकी प्रतिष्ठा दावं पर लगी है।

त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे पीटर-मुण्डा

इस बार का तमाड़ विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है, जिसमें त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना काफी प्रबल हो गई है। इस मुकाबले में मुख्य रूप से तीन योद्धाओं का टकराना निश्चित है। पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुण्डा हत्या के आरोपी और इस क्षेत्र से 2009 के विधायक गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर, पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुण्डा के पुत्र और 2014 एवं 2019 के विधायक विकास सिंह मुण्डा और नया चेहरा गुंजल इकीर मुण्डा। गौरतलब हो कि गुंजल पद्मश्री रामदयाल मुण्डा के पुत्र हैं, जो देश-दुनिया में एक अंतर्राष्ट्रीय कलाकार, शिक्षाविद् के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनके पिता भारत सरकार के कई पदों को सुशोभित कर चुके हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त है। झारखंड आंदोलन में भी पद्मश्री रामदयाल मुण्डा का उल्लेखनीय योगदान रहा है।

तमाड़ एक जड़ी-बूटी, करेंगे इलाज

तमाड़ मुण्डा बहुल क्षेत्र है और अनुसूचित जनजाति के लिए यह सीट आरक्षित है। स्थानीय मुण्डाओं से वार्ता के क्रम में मुझे ज्ञात हुआ कि तमाड़ एक जड़ी-बूटी का नाम है, जिसका इस्तेमाल आरंभ में गन्ने की खरपतवारों को खत्म करने के लिए किया जाता था। बाद में वैज्ञानिक खोजों से पता चला यह एस-ट्राइजाइन्स रासायनिक समूह से संबंधित है। इसके बाद इसका उपयोग घास और चौड़े पत्तेदार खरपतवारों को नष्ट करने के लिए किया जाने लगा। संभवत: इसी जड़ी-बूटी के कारण पूर्वजों ने इस क्षेत्र का नाम तमाड़ रखा हो। स्थानीय जनता इस नाम पर गर्व करती है और कहती है इस चुनाव में खरपतवार प्रत्याशी जो भी हैं, तमाड़ रूपी जड़ी-बूटी से उसका इलाज करेंगे। यही कारण है कि इस क्षेत्र में प्रत्याशियों को दूबारा जीतने में पसीने छूट गये। झारखंड गठन के बाद से स्वर्गीय रमेश सिंह मुण्डा 2000 (समता) एवं 2005 (जदयू) में एवं उनके पुत्र विकास मुण्डा 2014 (आजसू) एवं 2019 में (झामुमो) विधायक निर्वाचित हुए लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि इस बार उनकी भी राह आसान नहीं है।

19 प्रत्याशी चुनावी मैदान में

इस सीट पर अब तक कुल 19 प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश की है, जिसमें एक दर्जन प्रत्याशी निर्दलीय हैं हालांकि प्रबल योद्धा तीन को ही माना जा रहा है। प्रथम योद्धा जदयू से गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर हैं। ये वही राजा पीटर हैं, जिन्हाेंने वर्ष 2009 के उप चुनाव में दिशोम गुरु शिबूू सोरेन को मुख्यमंत्री रहते हराया और झारखंड की राजनीति में अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज की। भाजपा और आजसू का समर्थन पाकर राजा पीटर फूले नहीं समा रहे हैं लेकिन वह भूल गये हैं कि इस क्षेत्र के लोकप्रिय और दो बार के विधायक रहे रमेश सिंह मुण्डा की हत्या का उन पर आरोप है और वे जमानत पर हैं।

विधायक रहते ही उनकी हत्या उनके ही विधानसभा क्षेत्र में एक हाई स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कर दी गई थी। यदि वे जीवित होते तो संभवत: समीकरण कुछ और होता। दूसरे योद्धा स्वर्गीय रमेश सिंह मुण्डा के पुत्र विकास सिंह मुण्डा हैं जो इस सीट से लगातार दूसरी बार विधायक हैं बावजूद क्षेत्र में पेयजल, सड़क, बिजली, रोजगार एवं कृषि सुविधा आदि प्रमुख समस्या के रूप में अपना पैर पसारे हुए है। स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए 10 वर्ष का समय कम नहीं होता। विधायक चाहते तो क्षेत्र की सुरत बदल सकती थी। वहीं, तीसरा योद्धा बेदाग छवि वाला है और पहली बार राजनीति की बिसात में अपनी गोटियां बिछा रहा है।

यह योद्धा पद्मश्री स्वर्गीय राम दयाल मुण्डा के एकलौते पुत्र गुंजल इकीर मुण्डा हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड में लुप्तप्राय भाषाओं के सहायक प्राध्यापक के तौर पर कार्यरत 34 वर्षीय गुंजल को अपने पिता की ही तरह देश-दुनिया में एक अच्छे शोधकर्ता, व्याख्याता, विश्लेषणकर्ता एवं शिक्षाविद् के रूप में जाना जाता है। बहुत कम उम्र में ये राजनीतिक धुरधंरो से भीड़ने को तैयार हैं। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय है कि यदि गुंजल इकीर मुण्डा चुनाव जीतते हैं तो ऐसा पहली बार होगा जब क्षेत्र को इतना शिक्षित विधायक मिलेगा। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि जीत का सेहरा किसके सिर पर सजता है।

तमाड़ विधानसभा सीट से अब तक निर्वाचित विधायक:-

वर्ष

जो विधायक बने पार्टी
1952 भैया राम मुण्डा कांग्रेस
1957 धान सिंह मुण्डा झापा
1962 धान सिंह मुण्डा झापा
1967 बीआर मुण्डा कांग्रेस
1969 अनिरुद्ध पातर जनसंघ
1972 बंजाली सिंह मुण्डा कांग्रेस
1977 अनिरुद्ध पातर झापा
1980 टी. मुची राय मुण्डा कांग्रेस
1985 टी. मुची राय मुण्डा कांग्रेस
1990 टी. मुची राय मुण्डा कांग्रेस
1995 कालीचरण मुण्डा कांग्रेस
2000 रमेश सिंह मुण्डा समता पार्टी
2005 रमेश सिंह मुण्डा जदयू
2009 गोपाल कृष्ण पातर जदयू
2014 विकास सिंह मुण्डा आजसू
2019 विकास सिंह मुण्डा झामुमो

नामांकन करने वाले प्रत्याशियों के नाम

क्रम संख्या प्रत्याशी पार्टी
1 विकास सिंह मुण्डा झामुमो
2 गोपाल कृष्ण पातर जदयू
3 दमयंती मुण्डा जेएलकेएम
4 प्रेमशाही मुण्डा भारत आदिवासी पार्टी
5 सुुरेश मुण्डा सीपीआईएम
6 राजकुमार मुण्डा झापा
7 सचिन पातर बहुजन क्रांति पार्टी
8 गुंजल इकीर मुण्डा निर्दलीय
9 परमेश्वरी सांडिल निर्दलीय
10 सिंगराय टूटी निर्दलीय
11 प्रो.  लखींद्र मुण्डा निर्दलीय
12 प्राे. जेहला टूटी निर्दलीय
13 हराधन सिंह मुण्डा निर्दलीय
14 उदरकांत सिंह मुण्डा निर्दलीय
15 देवनंंदन सिंह मुण्डा निर्दलीय
16 ईशाहक हमसोय निर्दलीय
17 रविंद्रनाथ सिंह मुण्डा निर्दलीय
18 गुरुवा मुण्डा निर्दलीय
19 बीद सिंंह मुण्डा निर्दलीय

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