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Patna News: बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) विनोद सिंह गुंजियाल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिया है कि 6 अक्टूबर तक अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर और तैनाती की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
ट्रांसफर-तैनाती को लेकर सख्ती
सीईओ ने अपने पत्र में साफ कर दिया है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की तैनाती उनके गृह जिले में नहीं होगी। साथ ही जिनका कार्यकाल 30 नवंबर तक तीन साल पूरा हो रहा है, उनका तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा। आयोग का मानना है कि यह कदम चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
पत्र जारी होते ही राजनीतिक दलों में चर्चा तेज हो गई है कि अब चुनावी तारीखों की घोषणा ज्यादा दूर नहीं है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जैसे ही प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होगी, उसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बिहार का दौरा करेंगे और विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देंगे। इस संभावना ने प्रदेश में चुनावी सरगर्मी और बढ़ा दी है।
दलों ने बढ़ाई सक्रियता
सत्तारूढ़ गठबंधन से लेकर विपक्षी दलों तक सभी ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। प्रत्याशियों के नामों पर भी गहन मंथन चल रहा है। वहीं आम जनता में यह जिज्ञासा बढ़ गई है कि आखिर चुनाव कब होंगे और इस बार सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।
निष्पक्ष चुनाव की तैयारी
चुनाव आयोग हमेशा से ही निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने पर जोर देता आया है। यही वजह है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गृह जिले में पोस्टिंग रोकने और तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अफसरों का ट्रांसफर सुनिश्चित करने से आयोग यह संदेश देना चाहता है कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की पक्षपातपूर्ण स्थिति पैदा न हो।
जनता में उत्सुकता
आम तौर पर चुनाव आयोग प्रशासनिक तैयारियों को पूरा करने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम का ऐलान करता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। अब सभी की निगाहें 6 अक्टूबर पर टिकी हैं। जैसे ही इस तारीख तक ट्रांसफर-तैनाती की प्रक्रिया पूरी होगी, उसके तुरंत बाद आचार संहिता लागू होने और चुनावी तारीखों की घोषणा की संभावना जताई जा रही है।

