Patna News: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन चुनावी हलचल तेज हो चुकी है। हाल ही में लोक पोल द्वारा कराए गए सर्वे के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सर्वे में आरजेडी नेतृत्व वाले महागठबंधन को 118 से 126 सीटों के बीच जितने का अनुमान लगाया गया है, जबकि एनडीए को 105 से 114 सीटें मिलने का आंकड़ा सामने आया है।

यह सर्वे तेजस्वी यादव के पक्ष में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जो नीतीश कुमार और बीजेपी के लिए चुनौती से कम नहीं। बिहार की राजनीति में जाति, वर्ग और क्षेत्रीय समीकरणों का लंबे समय से खास महत्व रहा है। पिछले 17 वर्षों से नीतीश कुमार ने यह समीकरण संतुलित बनाए रखे हैं, लेकिन इस बार लहर कुछ बदली हुई नजर आ रही है।

युवा और महिलाएं महागठबंधन की ओर झुकी हैं

लोक पोल के सर्वे में खासतौर पर युवाओं और महिलाओं के बीच महागठबंधन की बढ़ती लोकप्रियता पर जोर दिया गया है। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा ने भी इस गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाया है। पहली बार मतदान करने वाले युवा तेजी से महागठबंधन की ओर मुड़ रहे हैं। उनका मानना है कि तेजस्वी यादव की ‘नौकरी देने वाली सरकार’ जैसी योजनाएं रोजगार संबंधी उम्मीद जगाती हैं।

हालांकि, एनडीए की सरकार ने पिछले कुछ महीनों में बुजुर्गों और विधवा महिलाओं के लिए मासिक भत्ता, बेरोजगार युवाओं के लिए आर्थिक सहायता और मुफ्त बिजली जैसी कई वेलफेयर स्कीम्स की घोषणा की है, जिसके लिए राज्य का भारी बजट आवंटित किया गया है। लेकिन सर्वे के नतीजों से यह स्पष्ट होता है कि इन रेवड़ियों का चुनावी परिणामों पर सीमित असर हुआ है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का विश्लेषण

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले घोषित वेलफेयर स्कीम्स का प्रभाव तात्कालिक नहीं होता, खासकर तब जब विपक्ष मजबूत विकास और रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाता हो। बिहार में भाजपा और जदयू समेत एनडीए गठबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी महागठबंधन के पक्ष में मतदाता को प्रभावित कर रहे हैं।

243 विधानसभा सीटों के इस चुनाव में महागठबंधन को 39 से 42 फीसदी वोट मिल सकते हैं, जबकि एनडीए को 38 से 41 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। सीटों की संख्या में महागठबंधन की बढ़त पार्टी की रणनीति को मजबूत करती दिख रही है।

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