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Health News: आज के दौर में मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन पर घंटों समय बिताने से आंखों की थकान, दर्द और जलन आम समस्याएं बन गई हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए भारत सरकार का आयुष मंत्रालय एक कारगर आयुर्वेदिक पद्धति ‘बिदालिका’ के बारे में जानकारी देता है, जिसे आयुर्वेदाचार्य आंखों को पोषण देने और उनकी रक्षा करने का एक प्रभावी तरीका बताते हैं।
आंखों के लिए आयुर्वेदिक वरदान ‘बिदालिका’: दर्द, जलन और कमजोर रोशनी का अचूक इलाज
बिदालिका या बिडालक, आयुर्वेद की ‘क्रियाकल्प’ पद्धति का एक हिस्सा है। इसमें औषधीय जड़ी-बूटियों से बना एक खास पेस्ट तैयार किया जाता है। इस लेप को पलकों को छोड़कर आँखों की बाहरी सतह पर एक निश्चित मोटाई में लगाया जाता है और तय समय तक रखा जाता है। यह उपचार मुख्य रूप से आँखों की सूजन और दर्द में तुरंत राहत के लिए किया जाता है।
दर्द, जलन और पित्त दोष में तुरंत राहत
बिदालिका आंखों में दर्द, जलन और सूजन को कम करने में सहायक है। यह पित्त दोष को शांत करता है और ठंडक प्रदान करता है। स्टाई (अंजननामिका), कंजंक्टिवाइटिस (आँख आना), और ब्लेफेराइटिस जैसी समस्याओं में यह तेजी से राहत देता है। नियमित बिदालिका दृष्टि को बेहतर बनाने में मदद करता है, रोशनी बढ़ाता है और आंखों की थकान, लालिमा तथा फोटोफोबिया (तेज रोशनी से परेशानी) जैसी शिकायतों को दूर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिदालिका का प्रभाव सीधे आँखों तक पहुँचता है, जिससे त्वरित राहत मिलती है। हालाँकि, यह अत्यंत आवश्यक है कि इस उपचार को हमेशा आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करवाएं और स्वयं इसका प्रयोग न करें। आंखों में किसी घाव, चोट या गंभीर बीमारी (जैसे ग्लूकोमा) होने पर यह उपचार वर्जित है। उपचार के बाद आंखों को आराम देना और स्क्रीन से दूर रहना ज़रूरी है।

