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Dhaka: बांग्लादेश में हुए ऐतिहासिक आम चुनावों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने प्रचंड जीत दर्ज की है। गुरुवार को हुए मतदान के बाद आए नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। बीएनपी ने अकेले 209 सीटों पर कब्जा जमाकर संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है, जो कि पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी जीतों में से एक है।
अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व में भारी गिरावट
हालांकि, बीएनपी की इस जीत के बीच एक चिंताजनक तस्वीर उभरकर आई है। 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में, जहां लगभग 8 प्रतिशत हिंदू रहते हैं, वहां नई संसद में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व लगभग खत्म होने की कगार पर है। इस चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था, जिनमें 10 महिलाएं शामिल थीं। लेकिन केवल 4 उम्मीदवार ही जीत हासिल कर सके और खास बात यह है कि ये चारों ही बीएनपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे।
संसद में बचेंगे सिर्फ दो हिंदू चेहरे
हिंदू समुदाय की बात करें तो नई संसद में केवल दो हिंदू सांसद होंगे। गोयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी ने बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीता है। इन दोनों नेताओं की जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्होंने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवारों को सीधे मुकाबले में हराया है। इनके अलावा बौद्ध समुदाय से सचिन प्रू और दीपेन दीवान भी बीएनपी के टिकट पर संसद पहुंचे हैं।
रहमान के सामने बड़ी चुनौतियां
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी थी। अब 60 वर्षीय तारिक रहमान पर कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और अल्पसंख्यकों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करने की भारी जिम्मेदारी है। रहमान ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘राष्ट्रीय एकता’ का आह्वान करते हुए कहा कि अराजकता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नई सरकार अल्पसंख्यकों को समान अधिकार और सुरक्षा देने के वादे को पूरा कर पाएगी।
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