Health News: अक्सर ऐसा होता है कि लोग भरपूर खाना खाते हैं, मिठाइयाँ और भारी भोजन लेते हैं, फिर भी वजन बढ़ता नहीं है। लेकिन जैसे ही बीमार होते हैं, वजन तेजी से गिर जाता है। आयुर्वेद इस पूरी प्रक्रिया को “पाचन अग्नि” यानी डाइजेस्टिव फायर से जोड़कर देखता है। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरह से वजन बढ़ाना तभी संभव है, जब शरीर की पाचन शक्ति मजबूत हो।
सुबह की शुरुआत ऐसे करें
आयुर्वेद में सुबह उठकर गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है। इससे मेटाबॉलिज्म सुधरता है और पाचन प्रक्रिया सक्रिय होती है। इसके बाद नाश्ते में केला, खजूर और अंजीर से बना शेक लेने की सलाह दी जाती है। यह पेय ऊर्जा, प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है, जो शरीर में स्वस्थ वजन बढ़ाने का आधार बनता है।
दोपहर और रात की प्लेट कैसी हो
दोपहर के भोजन में दाल और सब्जियों को जगह देना जरूरी है, जबकि रोटी की मात्रा हल्की रखें। रात में दलिया, खिचड़ी या सूप जैसा हल्का भोजन पाचन को राहत देता है। सोने से पहले गर्म दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पीने से शरीर में बल बढ़ता है और खून की गुणवत्ता भी सुधरती है।
आयुर्वेदिक नुस्खे जो शरीर को भीतर से मजबूत करते हैं
आयुर्वेद में वजन बढ़ाने के लिए छैना को बहुत उपयोगी माना गया है। यह मांसपेशियों को मजबूती देता है और हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। इसके साथ ही अश्वगंधा चूर्ण का रात में दूध के साथ सेवन muscles को ताकत देता है और धीरे-धीरे वजन बढ़ाने में मदद करता है। घी, केला और मिश्री का मिश्रण भी कई लोगों के लिए कारगर माना गया है।
इसके अलावा दूध में बादाम, खजूर, इलायची और केसर मिलाकर बनने वाला आयुर्वेदिक पेय शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देता है और धीरे-धीरे वजन बढ़ाता है।
आयुर्वेद का कहना है कि वजन बढ़ाना सिर्फ ज्यादा खाने का मामला नहीं है, बल्कि पाचन, दिनचर्या और नींद तीनों का संतुलन जरूरी है। यदि ये मजबूत हों, तो शरीर स्वाभाविक रूप से तंदुरुस्त और ऊर्जावान बनता है।



